
होशियारपुर/हरियाना (द स्टैलर न्यूज़), पराशर। कम्युनिटी हैल्थ सैंटर (सीएचसी) भूंगा में रात के समय इमरजैंसी में आने वाले लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं न मिलने के कारण उन्हें काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आलम यह है कि अगर वहां पर क्लास फोर कर्मचारी न हो तो लोगों को मल्हम पट्टी के लिए भी प्राइवेट अस्पताल या किसी मैडीकल स्टोर का रुख करना पड़े। अगर हम यह कहें कि रात के समय भूंगा सीएचसी सिर्फ क्लाफ फोर कर्मचारियों के सहारे ही चल रहा है।

आपको बता दें कि पिछले कुछ समय़ से भूंगा अस्पताल में लोगों को पेश आ रहीं परेशानियों को लेकर मामले सामने आ रहे थे। हमारी टीम ने रात के समय मौके पर पहुंचकर सारी स्थिति का जायजा लिया तो जो बातें सामने आईं वह सरकार एवं उच्चाधिकारियों के दावों की हवा निकालने के लिए काफी हैं। इमरजैंसी में स्टाफ के नाम पर क्लास फोर कर्मचारी उपलब्ध था। उसने बताया कि इमरजैंसी होने पर डाक्टर साहिब को बुलाया जाता है और उसने बताया कि बोर्ड पर डाक्टर का नंबर लिखा है, अतः उन्हें फोन करके बुला लें। जबकि किसी मरीज के आने पर डाक्टर को बुलाना स्टाफ का काम होता है। दूसरी तरफ स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि रात के समय डाक्टर की ड्यूटी लगाई जाती है और डाक्टर एवं स्टाफ को अस्पताल में होना चाहिए। परन्तु भूंगा अस्पताल में ऐसे कुछ भी देखने को नहीं मिला।
रात के समय अस्पताल में एक महिला जो हृदय रोग से ग्रसित थी, से कहा गया कि वह वहीं दिखाए, जहां से वह दवाई ले रही है। क्योंकि, डाक्टर उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा बीपी, शूगर एवं हादसे का शिकार लोगों को भी इलाज के लिए कहीं और जाने को कह दिया गया। इसके अलावा लड़ाई-झगड़े के मामले को देखने वाला भी वहां कोई नहीं था। सेवादार तो अपना कार्य पूरी निष्ठा से करता पाया गया, लेकिन अधिकारी वर्ग चदर तान कर सोता रहा। जिसका संताप वहां स्वास्थ्य सुविधाओं की आस में आने वाले लोगों को भोगने को मजबूर होना पड़ रहा है। इतना ही नहीं इस बारे में जब सीएमओ हरजीत सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि डाक्टर आन काल उपलब्ध हैं। जब उनसे पूछा गया कि रात के समय ड्यूटी क्यों नहीं लगाई जाती तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया।
इस संबंधी सिविल सर्जन डा. पवन कुमार से बात की गई तो उन्होंने कहा कि इमरजैंसी में डाक्टर होना चाहिए, आप एसएमओ से बात कर लें। इसके बाद एसएमओ को बार-बार फोन किया गया, लेकिन उन्होंने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। सुबह भी जब 9 बजे तक इमरजैंसी में कोई डाक्टर नहीं आया तो इस बारे में एक बार फिर सिविल सर्जन से बात की गई तो उनके कहने पर सवा 9 बजे डाक्टर अस्पताल पहुंचे।
जानकारी मिली है कि सायं 5 बजे से लेकर सुबह 9-साढे 9 बजे तक अस्पताल में डाक्टर उपलब्ध नहीं होते। जबकि, सरकार इस अस्पताल पर करीब एक करोड़ रुपये प्रति माह खर्त करती है। क्योंकि अस्पताल में डाक्टर, स्टाफ, क्लास फोर, लैब, पैरामैडीकल स्टाफ के खर्च के अलावा बिजली, पानी और अन्य खर्च का अनुमान लगाया जाए तो यह एक करोड़ के करीब पहुंच ही जाता है। ऐसे में सवाल यह है कि करोड़ों रुपये खर्च करके जनता को क्या लाभ मिल रहा है। इसका जवाब शायद ही विभाग के उच्चाधिकारियों एवं सरकार के पास हो।
आपको शायद याद हो कि विधान सभा चुनाव के दौरान तत्कालीन आप उम्मीदवार एवं मौजूदा मंत्री डा. रवजोत नंगे पांव हलके में घूमा करते थे और बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करवाए जाने की बातें करते थे। लेकिन आज जब वह मंत्री बन चुके हैं तो भी हलके में स्वास्थ्य सुविधाओं में सुधार के आसार नज़र नहीं आ रहे। लोगों ने कहा कि भूंगा अस्पताल मुख्य मार्ग पर है और लोग आसानी के साथ यहां पहुंचते हैं, लेकिन दुख तब होता है जब करोड़ों रुपये की लागत से बनाए गए इस अस्पताल का आम जनता को कोई लाभ मिलता नज़र नहीं आ रहा। क्योंकि रात के समय लोगों की परेशानी सुनने एवं उसका हल करने वाला कोई नहीं होता। इसलिए कैबिनेट मंत्री डा. रवजोत से अपील है कि वह सीएचसी भूंगा में रात के समय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के साथ-साथ डाक्टरों की ड्यूटी लगाए जाने एवं उनकी उपलब्धता पर ध्यान दें ताकि हलका वासियों को दूसरे शहरों का रुख न करना पड़े।












