
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रजनीश शर्मा। स्वर्ण जयंती राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला (उत्कृष्ट), टौणी देवी के विद्यार्थियों ने संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की है। यह जानकारी देते हुए प्रधानाचार्य रजनीश रांगड़ा ने संस्कृत भाषा के महत्व को रेखांकित करते हुए बताया कि संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारत की प्राचीनतम एवं समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक है। यह भाषा साहित्य, व्याकरण, दर्शन, विज्ञान, गणित और आयुर्वेद में अमूल्य योगदान रखती है और आधुनिक विज्ञान एवं तकनीकी क्षेत्रों में भी इसकी प्रासंगिकता बढ़ रही है।

विद्यालय के विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली द्वारा संचालित विशेष छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय द्वारा समर्थित इस योजना के तहत संस्कृत को मुख्य या वैकल्पिक विषय के रूप में चुनने वाले विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाती है। शैक्षणिक सत्र 2023-24 में विद्यालय के सात छात्र-छात्राओं-शिवानी, सलोनी, सारिका, कविता, रितिका, दिया भारती और प्रियांशु भाटिया-को यह प्रतिष्ठित छात्रवृत्ति प्राप्त हुई है। इसके अतिरिक्त, शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए 15 विद्यार्थियों का चयन इस योजना के तहत हुआ है। प्रत्येक चयनित विद्यार्थी को 6,000 रुपये की छात्रवृत्ति प्रदान की जाएगी। यह उपलब्धि विद्यालय और विद्यार्थियों की कड़ी मेहनत और संस्कृत भाषा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

इस छात्रवृत्ति प्राप्त करने के लिए विद्यार्थियों को कुछ शैक्षणिक मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है। सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए संस्कृत विषय में न्यूनतम 60% अंक तथा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 55% अंक आवश्यक हैं। यह योजना विद्यार्थियों को संस्कृत अध्ययन के प्रति प्रेरित करने और इसे जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। इस सफलता के पीछे विद्यालय के संस्कृत प्रवक्ता विजय शर्मा का विशेष योगदान रहा है। उनके कुशल मार्गदर्शन और अथक प्रयासों से विद्यालय में संस्कृत शिक्षा को नई ऊँचाइयाँ मिली हैं। उन्होंने संस्कृत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि संस्कृत हमारी सभ्यता की प्राचीनतम भाषा है और इसे सहेज कर रखना हम सबका कर्तव्य है। संस्कृत न केवल धार्मिक ग्रंथों की भाषा है, बल्कि यह तर्क, ज्ञान और विज्ञान की भी आधारशिला है।
संस्कृत भाषा की समृद्ध परंपरा और वैज्ञानिक स्वरूप इसे भविष्य के अध्ययन और अनुसंधान के लिए अत्यंत उपयुक्त बनाते हैं।प्रधानाचार्य ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को बधाई दी और कहा कि यह उपलब्धि विद्यालय के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण है। उन्होंने विद्यार्थियों को भविष्य में भी इसी प्रकार उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित किया। विद्यालय परिवार को विश्वास है कि संस्कृत शिक्षा के क्षेत्र में इस प्रकार की पहल आगे भी जारी रहेगी और अधिक से अधिक विद्यार्थी इससे लाभान्वित होंगे।












