Saturday, October 31, 2026
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आत्मा विनाश रहित है, इसमें किसी प्रकार का दोष नही हो सकताः आचार्य चंद्र मोहन

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़): योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में रविवार के सत्संग के दौरान सदगुरुदेव चमन लाल जी महाराज की शिक्षाओं का वर्णन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि इस युग में योग के प्रवर्तक योगेश्वर प्रभु रामलाल जी हमारे लिए ऋषियों का योग लाए जो हठयोग करके कुंडली जागृत कराके मोक्ष तक ले जाता है तथा राजयोग द्वारा भी मानसिक वृत्तियों को निरोध करके आत्म साक्षात्कार द्वारा ईश्वर को प्राप्त कर लेता है।

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उन्होंने कहा कि योग गृहस्थियों के लिए है। इसके षटकर्म नेति, धोती आदि शुद्धि के साधन करके हम प्राणों की साधना करते हैं तथा शरीर के रोगों से मुक्त रहते हैं। राजयोग में हमारा खान पान आचार विचार व्यवहार शुद्ध करके प्रभु के नजदीक पहुंचते हैं। हठयोग तथा राजयोग एक दूसरे के पूरक है। रोग मुक्त तथा सुंदर शरीर होते हुए भी यदि हमारे विचार अच्छे नहीं खान-पान ठीक नहीं जीवों से सदव्यवहार नहीं करते अथवा हिंसक व्यवहार करते हैं, झूठ बोलते हैं, चोरी करते हैं तो हमारे अच्छे शरीर का भी कोई लाभ नहीं। ना हम सुखी रहेंगे ना लोग हमसे सुखी रहेंगे। वेदों तथा शास्त्रों में राजयोग और हठयोग के अलावा भी कुछ अन्य योग बताए गए हैं जिनसे हम अच्छा सांसारिक जीवन व्यतीत करते हुए मोक्ष की तरफ आगे बढ़ सकते हैं।

उन्होंने कहा कि भगवान श्री कृष्ण ने हमें कर्म योग बताया है। इसमें चार बातें कही है। हम अपना निश्चित कर्म ईश्वर को याद करते हुए करें, फल की इच्छा त्याग कर करें। फल ईश्वर के हाथ में है ऐसा सोचकर निर- उत्साहित होकर कर्म का परित्याग भी ना करें। इस से आगे सांख्य योग बताया है कि कर्म करते हुए हम भगवान को या आत्मा को ना भूले अन्यथा हम कर्म करते हुए भटक जाएंगे तथा जिसे कर्म योग कहते हैं उसके विपरीत कर्म करने लग जाएंगे। आत्मा विनाश रहित है, इसमें किसी प्रकार का दोष नही हो सकता।  ऐसा चिंतन करने से हमारा संसार की नाशवान वस्तुओं से लगाव कम हो जाता है। ऐसे शुद्ध भाव से कर्म करते हुए जब हमें प्रयास के अनुरूप फल प्राप्त नहीं होता तो हम भगवान को कोसने लग जाते हैं कि उसने हमारे साथ न्याय नहीं किया। 

इस भावना से मुक्त होने के लिए शास्त्रों में समत्व योग बताया गया है।  इसमें ईश्वर में विश्वास रखते हुए उसकी कृपा से जो प्राप्त होता है उसमें समभाव रहता है। इससे आगे शास्त्रों में बुद्धि योग बताया गया है। बुद्धि को भटकाने वाली चीज मोह है। हमें बुद्धि को संभालना होगा। 

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