
अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब की पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेत्री लक्ष्मीकांता चावला ने प्रेैस विज्ञाप्ति जारी करते हुए कहा कि पंजाब के सभी अध्यापकों और बुद्धिजीवियों को पंजाब सरकार के इस निर्णय पर बेहद दुख है और विभाग के मंत्री जी और अधिकारियों की समझदारी पर तरस आता है। क्या सरकार ने स्कूल के मुखी पंजाबी लेक्चरार को निलंबित करने से पहले एक पल के लिए भी नहीं सोचा कि उनका यह निर्णय गलत है और इसका दुष्प्रभाव अन्य सभी स्कूलों, अध्यापकों और बच्चों पर जाएगा।

जो बच्चे तो अनुशासन में नहीं रहते उनको तो सरकार ने शाबाश दी है। वैसे सरकार यह बताए कि क्या सरकारी स्कूलों में अतिथियों के आने पर या स्कूल के फंक्शनों के लिए कोई खान पान सेवा विभाग खोला है। क्या हर स्कूल में एक इवेंट मैनेजर रखा हुआ है जो हर फंक्शन के समय मार्केट से किराए पर वेटर लेकर अतिथियों की सेवा करे। क्या सरकार यह नहीं जानती कि अध्यापक और विद्यार्थी हर संस्था में मिलकर काम करते हैं। सभी मंत्री व अधिकारी भी सोचें कि जब वे विद्यार्थी तो उन्होंने किस तरह अपने स्कूलों में अध्यापकों के साथ मिलकर काम किया था। स्वयं शिक्षा मंत्री ने भी अपने विद्यार्थी जीवन में ऐसा ही किया होगा।
मुझे हैरानगी है कि सभी अध्यापक यूनियन भी खामोश हैं और गोइंदवाल के लोग भी। इस निलंबन को तो पहले दिन ही स्वीकार नहीं करना चाहिए था। सबसे बड़ी ड्यूटी तो गोइंदवाल क्षेत्र के विधायक और सांसद की है। वह भी आंख कान बंद करके इस निलंबन के फैसले को सुन चुके हैं। पंजाब की शिक्षा जगत की क्रांति के नाम पर अगर इस तरह अध्यापक निलंबित करने हों तो फिर यह पंजाब की अध्यापक विद्यार्थी के मिल जुल कर काम करने की संस्कृति पर कुठाराघात है।












