Tuesday, October 20, 2026
Home Latest रथ यात्रा के उपलक्ष्य मे चौथी संध्या फेरी में उमड़ी भक्तों की...

रथ यात्रा के उपलक्ष्य मे चौथी संध्या फेरी में उमड़ी भक्तों की भारी भीड़

कपूरथला (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट-गौरव मढ़िया। 28 जून को होने वाली रथ यात्रा के उपलक्ष में सोमवात को इस्कान कपूरथला की  ओर से चौथी संध्या फ़ेरी ग्रीन पर्क मैं बड़ी ही धूमधाम से निकाली गई ।  संध्या हरिनाम फेरी में भक्तों का सैलाब  देखने को मिला। जिससे पता  चलता है कि लोगो मे  भगवान की रथ यात्रा को लेकर  कितना  उत्साह  है। भगवान जगन्नाथ जी ने घर घर जाकर लोगों को अपने पवित्र दर्शन दिए तथा कॉलोनी वासिओं ने बड़े ही उत्साह से भारी फूलों की वर्षा करके भगवान का सुंदर भव्य स्वागत किया। कॉलोनी निवासियों  ने भगवान जगन्नाथ जी की पालकी के समक्ष बहुत ही उत्साह से नृत्य किया।  ये  संध्या हरिनाम श्री कौड़ा जी के  निवास स्थान से शुरू होकर श्री मोहित अग्रवाल जी के  निवास स्थान पर जाकर समाप्त हुआ। श्री उमेश शारदा जी, श्री राजीव गुप्ता जी और हिमांशु कंडा जी के निवास स्थान में भक्तों ने कृष्णाप्रेम में भावपूर्ण नृत्य करके ब्रज वृंदावन धाम जैसे सुंदर वातावरण की अनुभूति करवाई ।

Advertisements

भगवान जगन्नाथ जी की कथा का गुणगान करते  हुए संचालक नीरज  अग्रवाल जी ने पदम पुराण में वर्णित भगवान श्री जगन्नाथ जी के रूप का वर्णन किया। प्रभु जी ने  बताया  कि  जब द्वारिका पुरी में, भगवान श्री कृष्णा ,माता रूकमणिी द्वारा  गोपियो के शुद्ध प्रेम की  गाथा को सुनते हैं तो ब्रज प्रेम के ताप से  उनके हाथ पिघलने लगे ओर उनकी आखे खुली की खुली रह गयीं! तब वहा   नारद जी प्रकट  हुए ओर भगवान जगन्नाथ जी  के समक्ष बोले की हे भगवान!  हम सभी आप  का  ये प्रेम पूर्ण कृपामयि  रूप देखने के लिए कई जनमों से  तरस  रहे थे।  नारद जी ने  भगवान से  वचन लिया की कल्युग मे  आप    मानव जाति का उद्धार  करने के लिए ,अपने इस दिव्या तथा भव्य रूप में अवश्य प्रकट हों .. भगवान ने  कहा की  मै भगवान जगन्नाथ लकड़ी के स्वरूप मे लोगों का  उधार करने के लिए आऊगा.  आज वही जगन्नाथ पुरी धाम यहा पर भगवान  जी  अपने  बड़े  भाई  बलदाऊ ओर भहन सुभद्रा सग विराजित है.  वहा के  महाराज इन्द्रधुम थे उनके सपने  में आकर  भगवान ने  कहा  था कि मै  यहा लकड़ी के रुप मे अवतार लुगा जिससे मानव जाति का क्ल्याण हो सके .

ये मानव जीवन  बहुत ही  जन्मो के  बाद मिला  है ओर जीव ऐसे ही बहुमुल्य जीवन को व्यर्थ  गवा  रहा  है।  हमे ये  मानव  शरीर  बार  बार  नही  मिलेगा।  अगर  इसी  जीवन  मे  भक्ति  करके  भगवान कृष्ण को पा  लिया तो  ठीक, नहीं तो  आगे  84 लाख योनिया  हमारा  इन्तजार  कर  रही  हैँ। इसका  कारण ये है की  मानव  देह  पाकर  मनुष्य सोचता है  की  उसकी  मृत्यु  नही  होगी ओर  वह  हमेशा के लिए इस  धरती पर  वास  करेगा. पर ऐसा  नही  होगा क्युकि  जिसका  जन्म हुआ है उसकी  मृत्यु निश्चित है. आज  मानव  अपने प्रति  अन्जान है उसे पता ही नहीं अपने बारे मे की वो  कौन है, कहा से आया है, क्यु आया वह, ओर इस धरातल  पर क्या  कर रहा है।  उसके जीवन  लेने  का  कारण क्या है।  उसे आज आधात्मिकता के बारे कुछ भी नहीं  पता।  ओर  न ही वो इसे  जानने  का  प्रयास  कर रहा है।  कारण ये है की  आज जीव के  पास समय ही नही है।   वो अपने जीवन मे  इतना डुबा  हुआ है की  जीवन मे  हर सुख को प्राप्त करने के लिए दिन भर भाग  रहा है पर  सुख मिलता  भी  है तो कुछ समय की लिये उसके  बाद  वो  फिर  दुखी हो  जाता  है  सुख केवल ओर  केवल  भगवान  जगन्नाथ जी के चरणों मे है ओर कही  नही। इसिलिये हमें हर समय भगवान की सेवा करने के लिए तैयार रहना चाहिए।

आगे बताते हुये प्रभुजी जी  ने  कहा की  28 जून को सभी शहर  निवासियो के  सहयोग  साथ भगवान की दिव्य रथ यात्रा निकाली जायेगी। इन हरिनाम संध्या फेरिओं से हम सभी का हृदय शुद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं ताकि भगवान् हमारे हृदय में प्रवेश कर सकें। जिसके  लिये  हर दिन संध्या हरिनाम निकाल कर लोगो को  भगवान के  हरिनाम मे  शामिल  होने के लिए  कहा  जाता है  ताकि उनका  मनुष्य  जीवन व्यर्थ ना जाये।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here