
हमीरपुर (द स्टैलर न्यूज़), रजनीश शर्मा। साहब! पाकिस्तानी गोलीबारी का जबाव तो हम सीना तानकर दे रहे हैं लेकिन घर पर बन रहे नेशनल हाईवे निर्माण की जेसीबी जब खून पसीने की कमाई से बने मकान को तोड़ने आ जाती है तो दिल दहल जाता है। ये शब्द हैं भारतीय सेना के पाकिस्तान बॉर्डर पर तैनात हमीरपुर जिला की बमसन तहसील के दरकोटी गांव के जवान प्यारचंद पुत्र टेक चंद के देश की सीमा पर तैनात इस जवान के मकान का मुआवजा भी एनएचएआई (मार्थ) के खिलाफ कोर्ट केस कर मिला। अब निर्माण कंपनी और एनएचएआई के अधिकारी और निर्माण कंपनी मिलकर बचे हुए मकान पर भी जेसीबी चलाने की धमकियां हर रोज दे रहे हैं। ऐसे में बॉर्डर पर तैनात इस जवान की मनोदशा का अंदाजा प्रशासन स्वयं लगा सकता है। सैनिक जवान का मकाम बचाने अब दरकोटी के लोग एक जुट हो गए हैं और बुर्जी तथा तय निशान से एक इंच भी आगे आने से निर्माण कंपनी को रोक रखा है। फिर भी निर्माण कंपनी की धौंस खत्म नहीं हो रही है। सैनिक प्यार चंद के भाई संजीव ने बताया कि उनका भाई पाकिस्तान बॉर्डर पर सेवाएं दे रहा है। निर्माण कंपनी बार बार मकान तोड़ने की धमकियां दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि इसी बचे हुए हिस्से में उनकी आरा मशीन भी हैं जिसका कोई मुआवजा भी नहीं मिला हैं। उन्होंने बताया कि प्वाइंट नंबर 150 के पास जितना निशान लगाया था उतना मकान स्वयं ही हमने तुड़वा दिया है। अब दूसरी तरफ रसूखदारों की जमीन बचाने के लिए हमारे बचे हुए मकान को भी तोड़ने की धमकियां मिल रही हैं। प्वाइंट नंबर 150 के पास डीपीआर, एलाइनमेंट और एक्वायर्ड लैंड को लेकर बहुत बड़ी गड़बड़ नजर आ रही है। दरकोटी निवासियों संजीव , सतीश , विचित्र, राजकुमार, विजय कुमार, मदन लाल इत्यादि ने जिला प्रशासन से स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेशनल हाइवे नंबर तीन के प्वाइंट नंबर 150 नज़दीक दरकोटी में तुरंत हस्तक्षेप कर सैनिक प्यार चंद के मकान को बचाने की गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कंपनी ने जोर जबरदस्ती से मकान तोड़ा तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।











