
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। प्राकृतिक व सामाजिक वातावरण प्रेमी वीर प्रताप ठाकुर ने किसानों से जैविक खेती अपनाने का अनुरोध किया। वीर प्रताप ठाकुर ने बताया कि जैविक खेती अपनाने से किसानों और मानवता को कई फायदे होंगे। जिनमें आर्थिक, पर्यावरणीय और स्वास्थ्य संबंधी लाभ शामिल हैं। जैविक खेती रसायनों पर निर्भरता कम करके प्राकृतिक संसाधनों का सही इस्तेमाल करना है। इसमें यूरिया खाद और कीटनाशकों का इस्तेमाल न होने से खेती का खर्च काफी कम हो जाता है। स्वास्थ्य के प्रति लोगों के जागरूक होने से जैविक उत्पादों की माँग बाजार में लगातार बढ़ रही है और जिससे इसके दाम भी रासायनिक उत्पादों की तुलना में ज्यादा होतें है।

जैविक खाद का उपयोग करने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे बार-बार महंगे रसायन डालने की जरूरत नहीं पड़ती। किसान अपने खेत में ही जैविक खाद और कीटनाशक नीम से तैयार कर सकते हैं। जैविक खेती से मिट्टी में जैविक पदार्थ और फायदेमंद कीडे मकोडों की संख्या बढ़ती है, जिससे मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ती है। यह मिट्टी की पानी सोखने की क्षमता को बढ़ाती है, जिससे कम पानी में भी अच्छी फसल पैदा होती है और पानी का जमीनी स्तर भी सुधरता है।
जैविक उत्पादों में कोई जहरीले रसायन नहीं होते, जिससे मनुष्यों और पशुओं के लिए स्वस्थ और बढिय उपज पैदा होती है। वहीं यह खेती पर्यावरण के संतुलन को बनाए रखने में मदद करती है। ठाकुर वीर प्रताप ने बताया कि यह खेती छोटे किसानों के लिए एक वरदान जैसी साबित हो सकती है क्योंकि इसका बाजार का भाव हैं दूसरी फसलों से ज्यादा मिलता है। जैविक खेती किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने, पर्यावरण की रक्षा करने और मानव जीवन को स्वस्थ बनाये रखने में फायदेमंद होगी ।












