Friday, October 30, 2026
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कांग्रेस ने संविधान को नकारा भाजपा ने दिया सम्मान: सूद

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। पूर्व कैबिनेट मंत्री व वरिष्ठ भाजपा नेता श्री तीक्ष्ण सूद द्वारा जारी प्रेस नोट में कहा हैं कि बीते कल 26 नवंबर को पूरे देश में संविधान दिवस घूम-धाम से मनाया गया। लोगों ने तथा सरकार ने अपने-अपने ढंग से सविधान दिवस को मना  कर सविधान निर्माताओं  बाबा साहिब भीम राव अम्बेडकर तथा डॉक्टर राजिंदर प्रसाद आदि  को याद किया।  भारत का सविधान कड़ी मेहनत से डॉ भीम राव अम्बेडकर के नेतृत्व में  गठित सविधान कमेटी ने तैयार किया था,  जिसे 26 नवंबर 1949 को आज़ाद भारत को  चलाने के लिए लागू किया गया।  यह पहला मौका था जब 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाली एन डी ऐ सरकार ने 26 नवंबर को इस सविधान लागू होने के   दिवस को हर साल “सविधान दिवस” के तौर पर  मनाने का फैसला किया।  

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भाजपा तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सदा ही लोकतंत्र तथा सविधान में अटूट विश्वास रहा हैं। 2014 में जब  श्री नरेदर मोदी पहली बार प्रधानमंत्री चुने गये तो उन्होंने लोकतंत्र के मंदिर, संसद की सीढ़ियों में माथा टेक कर अपना कार्यकाल  शुरू किया था।  2019 में जब  प्रधानमंत्री नरेदर मोदी दोवारा  प्रधानमंत्री चुनकर संसद के सेंट्रल हॉल में पहुंचे तो सविधान की प्रति को सिर पर  उठा कर उसके प्रति आदर की भावना व्यक्त की। बन्दे मातरम  जो केवल  राष्ट्रीय गीत हो नहीं अपितु आजादी के लिए लड़ने वाले हजारों लाखो योद्धाओं के दिलों को झ्जकोड ने का काम  करता  था।  उसके 150में सृजन  वर्ष को भी भाजपा तथा एन डी ऐ की सरकार ने धूमधाम से सम्मानपूर्वक मनाया दूसरी तरफ अगर कांग्रेस की बात करें तो बेशक राहुल गांधी सविधान की प्रतियां लेकर उसे बचाने के लिए ढोग करते नजर आये, उन्होंने कभी भी सविधान को  सम्मान नहीं दिया।  2010 में 26 नवंबर को सविधान लागू होने के 60 वर्ष पूरे हुए थे।  उस समय देश में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली सरकार थी , परन्तु उन्होंने उस दिन सविधान दिवस को मनाना तो एक तरफ उस दिवस को याद करने का भी कोई उपक्रम नहीं किया।  

1975 में कांग्रेस की प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी ने अपनी गद्दी को बचाने के लिए सविधान तथा लोकतंत्र  की धज्जियां उड़ा कर , उसे तार-तार कर दिया।  कांग्रेस ने समय- समय पर  सविधान को  अपने स्वार्थ के लिए  कई संशोधन कर डाले।  श्री सूद ने कहा कि कांग्रेस को अगर सत्ता में रहने का और समय मिलता तो शायद  डॉ.भीम राव अम्बेडकर द्वारा लिखे सविधान का मूल स्वरूप ही खत्म हो जाता।   

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