
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़): पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला में वाइस चांसलर डॉ. जगदीप सिंह के संरक्षण में पंजाबी विभाग और प्रकाशन ब्यूरो के संयुक्त प्रयास से 12वें पांच दिवसीय पुस्तक मेले और साहित्य उत्सव का आयोजन विभाग प्रमुख डॉ. राजवंत कौर पंजाबी के नेतृत्व में शानदार ढंग से किया गया। इस अवसर पर जहां देशभर के प्रकाशक अपनी पुस्तकों की प्रदर्शनी लगाने पहुंचे, वहीं पांच दिनों तक साहित्य, कला और संस्कृति के विभिन्न विषयों से संबंधित देश के विशेषज्ञ साहित्यकार और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। संगीतमय शामों के दौरान रंजीत कौर, गुलशन कोमल, सुखी बराड़ और देबी मखसूसपुरी जैसे कलाकारों ने खूब रौनक लगाई।

इस उत्सव के पांचवें दिन, आयोजकों ने समय की मांग को देखते हुए ‘बाल साहित्य संवाद’ के रूप में एक नई और स्वस्थ पहल की। इस स्तर पर बाल साहित्य की चर्चा किसी यूनिवर्सिटी में पहली बार आयोजित की गई। प्रबंधकों द्वारा यूनिवर्सिटी स्तर पर शुरू किये गए इस नए अध्याय में पंजाब के प्रमुख बाल साहित्य लेखक विशेष रूप से उपस्थित हुए, जिनमें अमृतसर से प्रसिद्ध उपन्यासकार नानक सिंह के पुत्र डॉ. कुलबीर सिंह सूरी, ‘बाल संदेश’ के संस्थापक संपादक गुरबख्श सिंह प्रीतलड़ी के पुत्र हृदयपाल सिंह, चंडीगढ़ से मनमोहन सिंह दाऊँ, पटियाला से डॉ. दर्शन सिंह आश्ट (सभी साहित्य अकादमी और शिरोमणि बाल साहित्य पुरस्कार विजेता) और दोआबा का प्रतिनिधित्व ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज एकमात्र पंजाबी बाल पत्रिका ‘निक्कियां करुंबलां ‘ के संपादक और शिरोमणि बाल साहित्य लेखक बलजिंदर मान (माहिलपुर, जिला होशियारपुर) ने किया।
बाल साहित्य के संवाद का विषय ‘बाल साहित्य का संकट: गुणवत्ता या कमी’ दिया गया था। जिस पर विशेषज्ञ विद्वानों ने अपने विचार प्रस्तुत करते हुए पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला के प्रबंधकों की इस पहल के लिए विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने कहा कि पंजाबी यूनिवर्सिटी पटियाला विश्वविद्यालय स्तर पर बाल साहित्य के महत्व को पहचानने वाली और इस विषय पर चर्चा करवाने वाली पहली यूनिवर्सिटी बन गई है। अब यहाँ से प्रेरणा लेकर अन्य विश्वविद्यालय भी बाल साहित्य की बात आगे बढ़ाएंगे। वे अपने विद्यार्थियों से बाल साहित्य के विभिन्न पहलुओं के बारे में शोध कार्य करवाने की जिम्मेदारी भी उठाएंगे।
भाषा के विकास की नींव बच्चों के साथ ही जुड़ती है। यदि बच्चे पंजाबी भाषा को प्यार और सम्मान देने लगेंगे, तो बड़ों को यह बात कहने की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी। बच्चों में पंजाबी भाषा के प्रति प्यार और सम्मान रोचक बाल साहित्य के माध्यम से ही पैदा किया जा सकता है। आयु वर्ग के अनुसार रचित बाल पुस्तकें और बाल पत्रिकाएं शिक्षकों और अभिभावकों द्वारा उनके हाथों तक जरूर पहुँचनी चाहिए। विचार-चर्चा में शामिल साहित्यकारों ने साहित्य की सृजन विधियों और विधाओं में शामिल कविता, कहानी, उपन्यास, चित्रकारी, एनीमेशन, पत्रिकाएं, शैक्षिक व्यवस्था, प्रकाशन, सरकार की भूमिका आदि विषयों पर बहुत गंभीरता से विचार किया और उन्हें निखारा। इस अवसर पर बलजिंदर मान ने जहाँ बाल साहित्य संवाद रचाया, वहीं संवादकर्ता के रूप में भी शानदार भूमिका निभाकर होशियारपुर, विशेषकर दोआबा का मान बढ़ाया।
इस अवसर पर प्रबंधकों द्वारा विचार-चर्चा में शामिल साहित्यकारों को पंजाबी विभाग की प्रमुख और मुख्य मेला प्रबंधक डॉ. राजवंत कौर पंजाबी द्वारा विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस विचार-चर्चा के दौरान डॉ. दर्शन सिंह आष्ट के दो नाटक संग्रह ‘तुसीं बच्चे कदों बणोगे अते होर बाल नाटक’, ‘चुगलखोर अते होर बाल नाटक’ और ‘निक्कियां करुंबलां’ का नवीनतम अंक भी जारी किया गया।
बाल साहित्य संवाद के अवसर पर पंजाबी प्रेमियों में नाटककार डॉ. कुलदीप सिंह दीप, सतपाल भीखी, तरसेम, डॉ. सुखदर्शन सिंह चहल, अमिंदर सिंह, बलदेव सिंह, सुखविंदर अमृत, गुरिंदर सिंह कलसी, विक्रम चंदेल, सिमरन अक्स, हरमनप्रीत कौर, हरवीर मान, हरिंदर गोगना, प्रिंस. सरवण सिंह, दविंदर पटियालवी, डॉ. जसवंत राय, दलजीत कौर दाऊं, कहानीकार नक्षदीप पंजकोहा, मोहन लाल, बलदेव सिंह सड़कनामा, जरनैल सिंह कनाडा, जिंदर, भगवंत रसूलपुरी, खुशवंत बरगाड़ी, डॉ. गुरमुख सिंह, जसवीर बेगमपुरी सहित विद्यार्थी, शिक्षक और बच्चे शामिल हुए।











