
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। अरोड़ा वंश सभा के सदस्य एवं कच्चा टोबा स्थित दुकान के मालिक गौरव खट्टर ने अपनी ईमानदारी और नैतिक मूल्यों का परिचय देते हुए एक दंपति की खोई हुई सोने की बाली संजीव अरोड़ा की मौजूदगी में उन्हें सुरक्षित वापस लौटाकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया। जानकारी देते हुए अरोड़ा वंश सभा के सरपरस्त एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा ने बताया कि कुछ दिन पूर्व गौरव शर्मा अपनी पत्नी जसवीर कौर के साथ कच्चा टोबा स्थित गौरव खट्टर की दुकान पर खरीदारी करने आए थे। खरीदारी के दौरान अनजाने में जसवीर कौर के कान की सोने की एक बाली दुकान में गिर गई।

इसकी जानकारी न तो दंपति को हुई और न ही दुकान मालिक को।अगले दिन जब गौरव खट्टर ने अपनी दुकान की नियमित सफाई की तो उन्हें फर्श पर सोने की बाली मिली। उन्हें यह नहीं पता था कि यह किस ग्राहक की है, इसलिए उन्होंने उसे सुरक्षित संभालकर रख लिया और उसके वास्तविक मालिक की प्रतीक्षा करने लगे।उधर, घर पहुंचने के बाद जब दंपति को बाली के गुम होने का पता चला तो उन्होंने पूरे घर और अन्य संभावित स्थानों पर काफी तलाश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। बाद में उन्हें याद आया कि वे कच्चा टोबा स्थित दुकान पर भी गए थे। उन्होंने गौरव खट्टर से संपर्क किया। पूरी बात सुनते ही गौरव खट्टर ने बताया कि उन्हें दुकान में एक सोने की बाली मिली है और उन्होंने दंपति को दुकान पर आकर उसे प्राप्त करने के लिए कहा।
अरोड़ा वंश सभा के सरपरस्त एवं प्रमुख समाजसेवी संजीव अरोड़ा की उपस्थिति में गौरव खट्टर ने पूरी तसल्ली के बाद जसवीर कौर, पत्नी गौरव शर्मा, को उनकी सोने की बाली सम्मानपूर्वक सौंप दी। अपनी खोई हुई अमानत वापस मिलने पर दंपति ने गौरव खट्टर का हृदय से धन्यवाद किया और उनकी ईमानदारी की भूरि-भूरि प्रशंसा की।इस अवसर पर संजीव अरोड़ा ने कहा कि ईमानदारी, विश्वास और नैतिक मूल्य ही किसी भी सभ्य समाज की सबसे बड़ी पहचान हैं। आज के समय में जब छोटी-छोटी बातों पर लोगों का विश्वास डगमगा जाता है, ऐसे में गौरव खट्टर जैसे लोगों के कार्य समाज में विश्वास और मानवता को मजबूत करने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि मिली हुई अमानत को उसके वास्तविक मालिक तक पहुंचाना केवल एक अच्छी आदत नहीं, बल्कि हमारी भारतीय संस्कृति और उच्च संस्कारों का प्रतीक है।
इस अवसर पर गौरव खट्टर ने कहा कि मुझे बहुत खुशी है कि मैं किसी की अमानत उसके वास्तविक मालिक तक सुरक्षित पहुंचा सका। मेरा मानना है कि जो वस्तु हमारी नहीं है, उस पर हमारा कोई अधिकार नहीं है। ईमानदारी और सच्चाई ही हमारे संस्कारों की पहचान है। यदि हर व्यक्ति अपने जीवन में इन मूल्यों को अपनाए, तो समाज में विश्वास और भाईचारा और अधिक मजबूत होगा।












