
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट: राकेश भार्गव। गुरु पूर्णिमा ज्ञान, श्रद्धा और समर्पण का पर्व है, जो आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है।यह गुरुओं के योगदान को याद करने और उन्हें सम्मान देने का दिन है। इसे महर्षि वेदव्यास की जयंती के रूप में भी जाना जाता है।

गुरु वह दीपक हैं जो हमारे जीवन के अंधकार को दूर करके हमें सफलता की राह दिखाते हैं। वे हमारे चरित्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गुरु पूर्णिमा पर, हम अपने सतगुरू का धन्यवाद करते हैं, जिनकी वजह से हम आगे बढ़ रहे हैं।भारतीय संस्कृति में गुरु को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। गुरु वह मार्गदर्शक है जो हमें अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाता है। “गु” का अर्थ है अंधकार और “रु” का अर्थ है नाश करने वाला। इस प्रकार, गुरु वह है जो अंधकार को नष्ट कर हमें सत्य और ज्ञान की राह दिखाता है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है:
“गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु: गुरुर्देवो महेश्वर:।
गुरु: साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नम:।।”
इसका अर्थ है कि गुरु ही ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान हैं। वे स्वयं परमब्रह्म हैं। गुरु केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला, और संस्कार भी सिखाते हैं।
इसी दिन भगवान बुद्ध ने अपने पहले उपदेश की शुरुआत की थी। गुरु पूर्णिमा का यह पर्व हमें यह सिखाता है कि गुरु के बिना हम जीवन की सही दिशा प्राप्त नहीं कर सकते हैं।
भारतीय संस्कृति में गुरु-शिष्य की परंपरा अत्यंत प्राचीन और पवित्र रही है। प्राचीन काल में शिष्य गुरुकुल में रहकर गुरु से ज्ञान प्राप्त करते थे। गुरु न केवल शिक्षा देते थे, बल्कि शिष्यों को जीवन के हर पहलू में मार्गदर्शन प्रदान करते थे। चाहे वह एकलव्य की गुरु भक्ति हो या अर्जुन का श्रीकृष्ण के प्रति समर्पण, ये सभी उदाहरण गुरु के महत्व को दर्शाते हैं। आज के समय में भी शिक्षक, माता-पिता, और कोई भी व्यक्ति जो हमें कुछ सिखाता है, वह गुरु का स्थान रखता है।
आज के युग में, जब हम विज्ञान और भौतिकता की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं, तो गुरु का महत्व और भी बढ़ गया है। गुरु हमें न केवल शैक्षणिक ज्ञान देते हैं, बल्कि नैतिकता, अनुशासन, और सही-गलत का भेद समझाने में भी मदद करते हैं।
गुरु पूर्णिमा का पर्व हमें यह सिखाता है कि जीवन में सही मार्गदर्शन के बिना सफलता प्राप्त करना कठिन है। गुरु वह नौका है जो हमें जीवन की तूफानी लहरों से पार लगाते हैं।गुरु पूर्णिमा के दिन हम सब यह संकल्प लें कि हम अपने गुरुओं के दिखाए मार्ग पर चलकर अपने जीवन को सार्थक बनाएंगे और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएंगे।











