
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान (डीजेजेएस) के स्थानीय आश्रम गौतम नगर में आयोजित विशेष साप्ताहिक सत्संग कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम आयुर्वेद दिवस के पावन अवसर पर समर्पित रहा, जिसमें दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान के संस्थापक एवं संचालक सर्व श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी सुश्री राधिका भारती जी ने अपने ओजस्वी विचारों से उपस्थित श्रद्धालुओं को मार्गदर्शित किया। साध्वी जी ने अपने प्रवचन में आयुर्वेद के ऐतिहासिक महत्व और आधुनिक परिप्रेक्ष्य में इसकी अपरिहार्य आवश्यकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने एक रोचक प्रसंग साझा करते हुए बताया कि जब प्राचीन काल में महर्षि चरक और धनवंतरी ने मानव कल्याण हेतु आयुर्वेद का ज्ञान संसार को प्रदान किया, तब इसका ध्येय केवल शारीरिक व्याधियों को दूर करना नहीं था, बल्कि मनुष्य को प्रकृति के साथ सामंजस्य बिठाकर जीना सिखाना था। जैसे एक कुशल शिल्पी किसी यंत्र की संरचना को समझकर उसकी मरम्मत करता है, ठीक उसी प्रकार आयुर्वेद मनुष्य के वात, पित्त और कफ जैसे तीन मूलभूत तत्वों को संतुलित कर उसे पूर्ण आरोग्यता प्रदान करता है। इतिहास साक्षी है कि जब विश्व चिकित्सा के प्रारंभिक चरणों में था, तब भारत का यह दिव्य ज्ञान संपूर्ण मानवता के लिए स्वास्थ्य का संबल बना हुआ था।

आधुनिक युग में जहाँ तकनीकी प्रगति ने जीवन को सुगम बनाया है, वहीं असंतुलित खान-पान, तनाव और अनियंत्रित दिनचर्या के कारण मानव शरीर अनेक जटिल रोगों का घर बन चुका है। साध्वी जी ने स्पष्ट किया कि केवल बाहरी औषधियों से रोगों को मिटाना संभव नहीं है, इसके लिए आंतरिक चेतना का जागृत होना अत्यंत आवश्यक है। संस्थान द्वारा संचालित ‘आरोग्य’ प्रकल्प का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि आयुर्वेद और सनातन सिद्धांतों को जीवन में अपनाकर ही हम मानसिक तनाव और शारीरिक विकारों पर विजय प्राप्त कर सकते हैं। जब मनुष्य एक पूर्ण ब्रह्मणिष्ठ गुरु द्वारा प्रदान किए गए ब्रह्मज्ञान के माध्यम से अपनी अंतरात्मा से जुड़ता है, तो उसकी जीवनी शक्ति स्वत: ही सुदृढ़ होने लगती है। मन की शांति और विचारों की पवित्रता ही शारीरिक स्वास्थ्य की पहली शर्त है। अंत में, उन्होंने सभी को अपनी दिनचर्या में प्राकृतिक नियमों और आयुर्वेद को अपनाने का संकल्प दिलाया, ताकि एक स्वस्थ, समृद्ध और दिव्य समाज का निर्माण हो सके।











