Saturday, November 7, 2026
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पंजाब के 3336 सरकारी स्कूलों की सुरक्षा के लिए ₹66.72 लाख का फंड जारी, कड़े दिशा-निर्देश लागू

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होशियारपुर (द सटैलर न्यूज़)। पंजाब के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों, शिक्षकों और स्कूल के बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने अहम कदम उठाया है। समग्र शिक्षा अभियान 2026-27 के तहत ‘फंड्स फॉर सेफ्टी एंड सिक्योरिटी’ (Funds for Safety and Security) गतिविधि के लिए राज्य के 3336 स्कूलों को कुल 66.72 लाख रुपये का फंड मंजूर किया गया है, जिसके तहत प्रत्येक स्कूल को 2000 रुपये की ग्रांट दी जाएगी।

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CCTV अपग्रेडेशन और सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य डायरेक्टर जनरल स्कूल एजुकेशन-कम-एसपीडी द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस राशि का उपयोग स्कूलों में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों को अपग्रेड करने या बढ़ाने के लिए किया जा सकता है। हर स्कूल को अपना ‘स्कूल सेफ्टी प्लान’ तैयार कर समय-समय पर उसे अपडेट करना होगा। स्कूल प्रमुख, शिक्षकों, अभिभावकों और स्थानीय प्रशासन के प्रतिनिधियों को मिलाकर एक ‘स्कूल सेफ्टी कमेटी’ का गठन भी किया जाएगा। इसके अलावा, स्कूल की इमारत, बिजली, पानी की सप्लाई, खेल के मैदान और लैब का सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य किया गया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।

आपातकालीन नंबर और मॉक ड्रिल स्कूलों में डिस्प्ले बोर्ड लगाए जाएंगे जिन पर पुलिस (112), फायर (101), एंबुलेंस (1081), महिला हेल्पलाइन (1091) और चाइल्ड हेल्पलाइन (1098) जैसे महत्वपूर्ण आपातकालीन नंबर दर्ज होंगे। आग, भूकंप या बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए समय-समय पर मॉक ड्रिल (Mock Drill) करवाई जाएगी और जरूरत के अनुसार शिक्षकों को फर्स्ट एड (First Aid) की ट्रेनिंग दी जाएगी।

बुलिंग और रैगिंग पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति विद्यार्थियों को गुड टच-बैड टच, पॉक्सो (POCSO) एक्ट, साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया के सुरक्षित उपयोग और ऑनलाइन धोखाधड़ी के खिलाफ नियमित रूप से जागरूक किया जाएगा। स्कूलों में किसी भी प्रकार की बुलिंग, रैगिंग, हिंसा, लिंग आधारित उत्पीड़न या बाल शोषण के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) नीति अपनाई जाएगी। इसके साथ ही, विद्यार्थियों की मानसिक और भावनात्मक तंदुरुस्ती के लिए काउंसलिंग सत्र और शिकायत निवारण प्रणाली की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा और स्कूल ट्रांसपोर्ट के नियमों का कड़ाई से पालन होगा।

स्कूल मैनेजमेंट कमेटी (SMC) में प्रस्ताव पारित करने के बाद ही इस राशि को वित्तीय नियमों के अनुसार खर्च किया जा सकेगा। विभाग ने स्पष्ट किया है कि खर्च किए गए फंड का पूरा ब्योरा स्टॉक रजिस्टर में दर्ज करने के साथ-साथ ‘प्रबंध पोर्टल’ (PRABANDH Portal) पर समय पर अपडेट करना अनिवार्य है।

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