Tuesday, October 20, 2026
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लोकसभा मतदान से पहले अकाली दल की मान्यता होगी रद्द, दो विधान रखने के फ्रॉड में अकाली नेता जाएंगें जेल: खेड़ा

होशियारपुर(द स्टैलर न्यूज़),रिपोर्ट: मुक्ता वालिया। सोशलिस्ट पार्टी (इंडिया) के पार्टी नेता स. बलवंत सिंह खेड़ा और ओम सिंह सटियाणा जनरल सचिव पंजाब जोकि 30 साल से शिरोमणी अकाली दल के सरप्रस्त प्रकाश सिंह बादल, सुखबीर सिंह बादल, रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा एम.पी, सुखदेव सिंह ढींडसा एम.पी, दलजीत सिंह चीमा तथा अन्य नेताओं के विरुद्ध साजि़श, फ्रॉड, जायस -शाजी और दो विधान रखने संबंधी मुकदमो की पैरवी कर रहे हैं, ने यहाँ प्रैस वार्ता में दावा किया कि लोकसभा मतदान से पहले इस पार्टी की मान्यता रद्द हो सकती है, और लालू और चोटाले की तरह बादल गिरोह जेल जाएगी।

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इन विरुद्ध आई.पी.सी. की धारायें 182, 199, 200, 420, 465, 466 ,468, 471 व 120 – बी के अंतर्गत चीफ़ जुडिशियल मैजिस्ट्रेट गुरशेर सिंह की अदालत में केस चल रहा है और सभी गवाहों के बयान हो चुके हैं। दिल्ली हाई कोर्ट में प्रसिद्ध वकील इंद्रा -उनियार ने 19 फरवरी को जल्द सुनवाई के लिए दरख़ास्त दी थी। इस पर चीफ़ जस्टिस राजेंद्र मेनन और जस्टिस भी कमेश्वर राव के बैंच ने आदेश दिया है, कि दोनों बिनेकर्ता बडी आयु के हैं और उन की इच्छा है कि यह मामला उनके जीवन -काल में सुना जाए और लोकसभा मतदान भी नज़दीक हैं। इन मामलो की सुनवाई 3 अप्रैल को रख दी गई है।

उन्होंने भारत के चयन कमीशन, शिरोमणी अकाली दल, गुरुद्वारा प्रबंधक समिति, चीफ़ कमिश्नर गुरुद्वारा मतदान पंजाब, दिल्ली गुरुद्वारा समिति डायरैक्टोरेट गुरुद्वारा मतदान दिल्ली सरकार और पंजाब चयन कमीशन को 2 हफ्ते के अंदर अपने पक्ष रखने के आदेश दिए गए हैं तथा चेतावनी दी है कि इसके बाद और मौका नहीं दिया जायेगा। श्री खेड़ा ने पत्रकारों से बातचीत में बताया कि चरनजीत सिंह बराड़, सचिव शिरोमणी अकाली दल और मनजीत सिंह तरनतारनी पूर्व सचिव के अदालत में दिए बयान पेश किये, जिनमें तरनतारनी ने कहा कि उन्होंने 1989 में प्रकाश सिंह बादल के हुक्मों के साथ भारत के चयन कमीशन को दस्तावेज़ भेजे थे जिस पर मनजीत सिंह कलकत्ता और शविन्दर सिंह एम.पी के हस्ताक्षर हैं।

उन्होंने पार्टी का 1974 का प्रकाशित विधान भी पेश किया। उन्होंने बताया कि जनरल जलसा में पार्टी को धर्म -निष्पक्ष बनाने संबंधी मंजूरी नहीं ली गई थी। इससे पहले अदालत में श्री बराड़ ने पार्टी का कार्यवाही रजिस्टर तथा और रिकार्ड पेश किया। इस अनुसार प्रकाश सिंह बादल 2000 में संविधान संशोधन समिति जत्थेदार रणजीत सिंह ब्रह्मपुरा की अध्यक्षता मे बनाई थी, जिसने अपनी सिफारिशों में पार्टी को सैकूलर बनाने के लिए 2004 में सिफारिश की थी। उन्होंने माना कि नया संविधान पंजाबी में नहीं बल्कि अंग्रेज़ी में पैंफ़लेट की शक्ल में लगाया गया था। यह सारी कार्यवाही दलजीत सिंह चीमा ने लिखी थी।

ओम सिंह सटियाना ने दोष लगाया कि 1995 में मोगा ऐलान -नामा जिसमें पार्टी को पंजाबी पार्टी घोषित किया था। बरनाला और बादल धढ़ों में 1996 में किया रलेवां भी ग़ैर कानूनी था। क्योंकि जनरल हाउस की प्रवानगी नहीं ली गई थी। जानकार सूत्रों का मानना है कि बराड़ और तरनतारनी के बयानों के साथ कोर समिति के सभी मैंबर बूरे फंस गए हैं। पंजाब प्रधान हरजिन्दर सिंह मनशाहिया ने बताया कि पार्टी की तरफ से बठिंडा और संगरूर हल्कों में उम्मीदवार खड़े करने की तजवीज़ है। इस संबंधी कार्यकारिणी की बैठक के बाद बाकायदा ऐलान किया जायेगा। इस अवसर पर रजिन्दर कौर दानी, कामरेड अशोक निर्दोष और प्रधान चण्डीगढ़ भगवंत सिंह बेदी उपस्थित थे।

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