Sunday, October 18, 2026
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गांव सलेरन में श्रद्धापूर्वक मनाया डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 118वां जन्मदिन

होशियारपुर(द स्टैलर न्यूज़)। आज 6 जुलाई को स्लेरण की पंचायत में भारतीय जनसंघ के संस्थापक डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का 118वां जन्मदिन श्रद्धापूर्वक मनाया गया। इस अवसर पर श्यामा प्रसाद मुखर्ज़ी की जीवनी के बारे में बताते हुए पूर्व मंत्री विजय सांपला ने बताया की श्यामा प्रसाद मुखर्ज़ी का जन्म 6 जुलाई 1901 को कलकत्ता में हुआ। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी एक शिक्षाविद् के रूप में विख्यात थे। उन्होंने सन 1917 में मैट्रिक किया तथा 1921 में बी.ए. की परीक्षा प्रथम स्थान के साथ उत्तीर्ण की।

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इसके बाद उन्होंने बंगाली विषय में एम.ए. भी प्रथम स्थान के साथ उत्तीर्ण किया और सन 1924 में क़ानून की भी पढ़ाई पूरी की। इस प्रकार उन्होंने अल्पायु में ही विद्याध्ययन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलताएँ अर्जित कीं, और शीघ्र ही उनकी ख्याति एक शिक्षाविद् और लोकप्रिय प्रशासक के रूप में फ़ैल गई। सन 1924 में पिता की मृत्यु के बाद उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट में वकालत के लिए पंजीकरण करवाया। सन 1934 में कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति बनने वाले वे सबसे कम उम्र के व्यक्ति थे। डा. मुखर्ज़ी के राजनैतिक जीवन की शुरुआत सन 1929 में हुई। सन 1941-42 में वह बंगाल राज्य के वित्त मंत्री रहे। 1944 में वो हिन्दू महासभा के अध्यक्ष भी रहे। 1951 में ‘भारतीय जनसंघ’ का उद्भव हुआ। सन 1952 के चुनाव में भारतीय जन संघ ने कुल तीन सीटें जीती, जिसमें एक उनकी खुद की सीट शामिल थी। डा. मुखर्जी जम्मू कश्मीर राज्य को एक अलग दर्जा दिए जाने के घोर विरोधी थे और चाहते थे की जम्मू कश्मीर को भी भारत के अन्य राज्यों की तरह माना जाये।

वो जम्मू कश्मीर के अलग झंडे, अलग निशान और अलग संविधान के विरोधी थे। उनको ये बात भी नागवार लगती थी कि वहाँ का मुख्यमन्त्री, प्रधानमन्त्री कहलाता था। उन्होंने देश की संसद में धारा-370 को समाप्त करने की जोरदार वकालत की। अगस्त 1952 में उन्होंने बिना परमिट लिए जम्मू कश्मीर में प्रवेश का एलान किया और इसे पूरा करने के लिये वे 1953 में बिना परमिट के जम्मू कश्मीर की यात्रा पर निकल पड़े। वहाँ पहुँचते ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और 23 जून 1953 को रहस्यमय परिस्थितियों में उनकी मृत्यु हो गई। उनके द्वारा किए गए कार्यों एवं बलिदान को भारत का इतिहास भूल नहीं सकता। इस मौके पर अश्वनी ओहरी, भारत भूषण वर्मा, नवजिंदर सिंह बेदी (नवी), चमनलाल बंटी, राम धन, जोगिंदर कौर, शिव दयाल, रेशम सिंह, बलदीप मान, अमरीक सिंह, सतनाम सिंह, लक्की, सूरज़ और जसपाल इत्यादि सहित भारी संख्या में गांव के लोग उपस्थित थे।

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