
राजौरी (द स्टैलर न्यूज़), रिपोर्ट: अनिल भारद्वाज। नोवल कोरोना वायरस की इस महामारी के चलते सरकार प्रशासन द्वारा उठाए जा रहे कदम तथा सरकार प्रशासन की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है जिला प्रशासन राजौरी हालात से निपटने में बिल्कुल विफल साबित हो रहा है, क्योंकि एक और सार्वजनिक जगहों से लेकर बाजारों में बिना मास्क पहने कई लोग बिना सामाजिक दूरी के सोशल डिस्टेंसिंग की खूब धज्जियां उड़ाते दिखाई दे रहे हैं वहीं खासकर क्वॉरेंटाइन सैंटरो में क्वॉरेंटाइन किए लोग साथ ही राजौरी में रखे कोरोना पीडि़त लोग भी प्रशासन के ढीले रवैए पर खूब सवाल उठा रहे हैं। राजौरी के नगरोटा में जिन कोरोना पीडि़त लोगों को रखा गया वह भी सुविधाओं से महरूम हैं। फोन पर समस्या वयां कर रहे हैं। सिर्फ चावल ही दिए जा रहे हैं। चाय, चपाती कुछ भी नहीं दिया जा रहा सिर्फ चावल खिलाकर हमारी सेहत बिगाड़ रहें है। जहां हमारी कोई बात नहीं सुनता। लोगों ने कहा कि हमारी समस्या व आवाज को दबा दिया जाता है।

तो वहीं राजौरी जिला के अंतर्गत कईं जगहों में खेल प्रतियोगिता (दंगल) में उमड़ी भीड़, राजनीतिक पार्टियों के कार्यक्रम और शहर, कस्बे में लोगों की दिन की आवाजाही भीड़ देख आप खुद अंदाजा लगाया जा सकते हैं कि इस महामारी से निपटने के कैसे बंदोबस्त किए जा रहे हैं। सरकारी आदेश सब फेल, शारीरिक दूरी का कहीं भी पालन नहीं किया जा रहा, टी स्टाल, मिठाई दुकान पर दवाकर कमाई हो रही है। यानी सरकारी आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। क्वॉरेंटाइन किए कुछ लोगों ने बताया कि हम में से कई लोगों को 1 माह से भी ज्यादा का समय हो गया है लेकिन अभी तक हमारी सेंपलिंग रिपोर्ट में देरी क्यों हो रही है यह बात हमारी समझ से परे है और हमें कुछ भी स्पष्ट नहीं बताया जा रहा कि आखिर सेंपलिंग रिपोर्ट आने में देरी क्यों हो रही है।
-कोविड-19 जैसे हालात से निपटने में जिला प्रशासन नाकाम, सरकारी आदेश की उड़ाई जा रही सरेआम धज्जियां
क्वॉरेंटाइन सेंटर गल्र्स हॉस्टल कालाकोट में क्वॉरेंटाइन में रखे गए नरेश कुमार ने बताया कि 18 मई को पहला सैंपल टेस्ट के लिए भेजा गया और फिर 26 को वापस दूसरा सैंपल लिया गया यह दोनों रिपोर्ट नेगेटिव आई लेकिन उसके उपरांत लिए के टेस्ट की ना तो रिपोर्ट अभी आई और न ही घर भेजने पर कुछ स्पष्ट बताया जा रहा है। देख भाल नहीं हो रही है ऐसे लगता है जैसे हम लोगों ने कोई गुनाह किया है और हमें सजा दी जा रही है। जहां रह कर मानसिक तनाव से ग्रस्त हो रहे हैं।
कालाकोट में पहले भी सेंटर में रखे लोग नाराजगी जता चुके हैं। इसी तरह रवि कुमार ने बताया कि पहला टेस्ट 14 मई को फिर 27 को और फिर 10 जून को लिया गया लेकिन अभी 10 जून को लिए गए सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई वही अब्दुल कयूम, प्रवीण कुमार आदि ने बताया कि हमें पिछले 9 मई से क्वॉरेंटाइन में रखा गया है लेकिन अभी तक आखरी सैंपल की रिपोर्ट ना आने की वजह से हमें जबरदस्ती जहां पर रखा गया है और हमारे द्वारा आवाज उठाने पर हमें प्रताडि़त भी किया जाता है हमारे लिए जहां प्रशासनिक क्वॉरेंटाइन सेंटर के हालात बद से बदतर होते जा रहे हैं 34 दिनों से क्वॉरेंटाइन सेंटर में पड़े हुए हैं लेकिन जहां पर प्रशासनिक अधिकारी हर रोज हमें एक या 2 दिन रुकने का भरोसा देकर टाल देते हैं यदि यही हालात रहे तो हमारे लिए सहन करना मुश्किल होगा यदि किसी भी व्यक्ति ने किसी नियम को तोड़ा तो उसके लिए बड़े प्रशासनिक अधिकारी ही जिम्मेदार होंगे ।
उन्होंने कहा कि क्वॉरेंटाइन सेंटर में पर्याप्त सुविधाएं भी नहीं मिल रही और हमारे हालात जहां बद से बदतर हो गए हैं और प्रशासन द्वारा भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वहीं क्वारंटाइन सेंटर का दौरा कर क्वारंटाइन किए गए लोगों से बातचीत के दौरान पार्षद दरबारी लाल ने हालात चिंताजनक पाए उन्होंने बताया कि खासकर लिए गए सैंपल की रिपोर्ट में देरी ने लोगों को परेशान कर कर रखा है और प्रशासन को चाहिए कि एक स्पेशल टीम गठित की जाए जो नियमित समय में रिपोर्ट लाने तथा ले जाने का काम करें और रिपोर्ट समय पर आएं और लोगों को भी क्वॉरेंटाइन से जल्द छुट्टी मिले वहीं कांग्रेस नेता तथा पूर्व विधायक कालाकोट अशोक शर्मा ने भी कहा कि खासकर क्वारंटाइन किए गए लोगों की नाराजगी तथा राजौरी जिला लापरवाही व नाकामी को दर्शा रहा। प्रशासन को चाहिए कि वह योजना बद तरीके से कार्य करें जिससे क्वारंटाइन किए गए लोगों को परेशानी ना हो वहीं इस संबंध में एडीसी कालाकोट कृष्ण लाल का कहना है कि क्वारंटाइन में जिन लोगों को ज्यादा दिन हो गए हैं वह जिद पर अड़े हुए हैं कि घर भेजा जाए लेकिन सैंपल की रिपोर्ट के बिना किसी को भी घर नहीं भेजा जा सकता जिसके लिए प्रशासन मजबूर है उन्होंने कहा कि इस बात से क्वॉरेंटाइन किए गए लोगों से भी बात की गई है और मजबूरी उन्हें भी बताई गई है लेकिन वह मानने को तैयार नहीं है इस कारण उनमें रोष बना हुआ है। वहीं दूसरी और जिन कोरोना पीडि़त लोगों को राजौरी में रखा गया है उनकी देख भाल करने में जिला प्रशासन असमर्थ बताया जा रहा है। एक पीडि़त व्यक्ति ने बताया कि जहां पर कोई सुविधा नहीं है सिर्फ चावल दिए जा रहे हैं पेट खराब होने पर दवाई मांगी पर नहीं दी गई बाद में एक पुलिस जवान ने टेबलेट दी। ऐसे लगता है जहां हमें मारने के लिए रखा गया है। वहीं कोरोना सेंटर कोटधड़ा (राजौरी) में जो भी कोरोना पीडि़त लोग है वह बिना रोक टोक के खुले में घूमते है। सेंटर से बाहर नहाने के लिए आते है। पुलिस की भी नहीं सुनते। जल्द से जल्द लापरवाही में सुधार लाया जाए और उन्हें फाइव स्टार तो नहीं आम सुविधा तो प्रदान करों। राजौरी के लोगों ने कहा कि कोरोना के नाम पर जारी पैसा कहां जा रहा है। राजौरी जिला के अंतर्गत खेल प्रतियोगिता भी हो रहीं हैं, राजनीतिक पार्टियों के कार्यक्रम और शहर, कस्बे में लोगों की भीड़ देख खुद अंदाजा लगाया जा सकता है कि इस महामारी से निपटने के कैसे बंदोबस्त किए जा रहे हैं। शारीरिक दूरी का कहीं भी पालन नहीं किया जा रहा, चाय, मिठाई आदि दुकानों पर कोरोना को फैलाया जा रहा है। यानी के सरकारी आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। जिसपर रोक लगाने बाला कोई नजर नहीं आ रहा जिसकी बजह से प्रशासन जनता के सवालों ? के घेरे में आ रहा है। अगर ऐसे ही लापरवाही रही तो वो पल दूर नहीं जब नोवल कोरोना पूरे क्षेत्र को अपनी चपेट में लेकर तबाही मचाना शुरू कर देगा। तब प्रशासन और सरकार क्या करेगी। यह बहुत बड़ा चिंता का विषय है।











