Monday, October 19, 2026
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चिंता और चिंतन जरूरी, पर निराश और भयभीत क्यों?: लक्ष्मीकांता चावला 

अमृतसर (द स्टैलर न्यूज़)। भारत के राष्ट्रपति द्रोपदी मूर्मू ने कोलकता में डाक्टर महिला के यौन शोषण और उसकी हत्या तथा देश में अन्य हजारों बेटियों के साथ अपराध से व्यथित होकर जो अपनी पीड़ा व्यकत की है वह महत्वपूर्ण है। पूरा देश चाहता है कि इस अपराध, पाप से भारत को मुक्त किया जाए। आज की स्थिति तो यह है कि लगभग 100 बेटियां-किसी भी आयु की प्रतिदिन इसी उत्पीड़न और शोषण का शिकार होती हैं। राष्ट्रपति जी से यह प्रार्थना है निवेदन है कि वे चिंता भी करें, चिंतन भी करें। उनका चिंतन पूरे देश को रास्ता देगा, पर उनसे यह आशा रखते हैं कि वे यह संदेश दें कि उनके रहते भारत की किसी भी बेटी को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं और निराश तो होना ही नहीं चाहिए। जब देश विश्वाास और आशा के साथ चलेगा तो भारत देश में महिला उत्पीड़न का जो काला अध्याय लिखा जा रहा है चल रहा है।

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उससे देश की बेटियां मुक्त होंगी। भारत की सभी महिलाओं को राष्ट्रपति जी यह संदेश अवश्य दें कि अपने घर के हर पुरुष से संकल्प और शपथ ली जाए कि वे कोई काम नहीं करेंगे जिससे महिलाओं की गरिमा को ठेस लगे। वैसे जिस देश में रेड लाइट एरिया अर्थात वेश्यालय चलते हैं, डांस बार में महिलाओं के हाथ से शराब लेकर नशे से झूमते हैं, फैशन मेलों में उनके अर्ध नग्न शरीरों का प्रदर्शन होता है वहां राष्ट्रपति जी को स्वयं संज्ञान लेकर ऐसे सभी काम बंद करवाने चाहिए जहां कामुकता बढ़ाने वाले और महिलाओं को व्यक्ति नहीं वस्तु समझकर काम किया जाता है।

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