
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। प्रमुख आध्यात्मिक मार्गदर्शक संगीता मित्तल ने संजीवनी शरणम् के लोटस हॉल में गुरु पूर्णिमा को समर्पित चार तरह की माइंडफुल मेडिटेशन से साधकों को ब्रह्म ऊर्जा से ओतप्रोत करते हुए एकत्व, समर्पण और प्रेम का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की मैडिटेशन को नित्य जीवन का अभिन्न अंग बनाते हुए निरन्तर अभ्यास करना चाहिए ताकि हम हमारे भीतर विराजमान सद्गुरु का आत्मसात कर सकें। अगर आप चाहते हैं कि आपका आने वाला समय बेहतर हो तो आज से ही ध्यान की यात्रा शुरू कर दें। ध्यान से हम सिंक्रोनाइज़ अर्थात ईश्वर से संवाद की स्थिति में पहुँच सकते हैं. और जो साधक परमात्मा के सन्देश पाना शुरू कर देता है उसका पूरा जीवन परिवर्तित हो जाता है।

तो हम सभी गुरु पूर्णिमा का पवित्र अवसर पर उस गुरु को ,जो जन्म मरण से परे है ,को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए ध्यान की शुरुआत करें. ईश्वर से प्रार्थना करें कि हे प्रभु मुझे इस काबिल बना, तेरे संवाद मैं समझ सकूँ। याद रखें कि बाहरी शोर अगर तेज़ है तो भीतर के संवाद सुनाई नहीं पड़ते। आत्मा की उन्नति और हमारा आभामंडल केवल ध्यान से ही प्रकाशित होता है। अपनी प्रार्थना में रोजाना प्रभु का शुक्राना करना न भूलें और यह भी स्मरण रखें कि आपके वचनो से किसी को हानि न हो. ईश्वर के प्रति शुक्रगुजार होने और प्रेममय होने पर हमारे भीतर दिव्य ऊर्जा का प्रवेश होता है. इस बात को अच्छी तरह से समझें कि हर वो शख्स जो हमारे गुरु तत्व को जगा दे वह हमारा गुरु है। “पूरा जीवन ही गुरु है, यदि दृष्टि खुली हो।” इस धरती पर हम सब शिष्य हैं और यह यात्रा, चाहे जैसी भी हो,हमें धीरे-धीरे, एक-एक अनुभव के माध्यम से एकत्व की ओर ले जाती है ध्यान के अनेक लाभ बताते हुए श्री मति संगीता मित्तल जी ने सभी साधकों के साथ ध्यान की प्रक्रिया की शुरुआत की. आप कौन हैं, आपकी ज़िन्दगी क्या है, भीतर जो भी घटित हो रहा है उस पर ध्यान देते हुए माइंडफुलनेस के साथ किसी के भी प्रति क्रिया-प्रतिक्रिया को भूल जाएँ और महसूस करें कि दिव्य आशीर्वाद को पाने का यही अवसर है।
ईश्वर की भक्ति सर्वोच्च भक्ति है यह सर्वोच्च समर्पण है उल्लेखनीय है कि श्री मति संगीता मित्तल द्वारा अक्सर ध्यान से जुड़ीं ऐसी बेहतरीन तकनीकों से साधकों को अवगत करवाया जाता रहा है ,जिसके बहुत उत्तम परिणाम देखने को मिले हैं। इस ध्यान क्रिया के बेहतरीन प्रयास पर सभी साधकों ने श्रीमती संगीता मित्तल का तहे दिल से धन्यवाद किया। श्रीमती मित्तल ने इस मौके पर 100 से अधिक साधकों जिनमे संजीवनी शरणम् के सदस्य, रेकी हीलर भी शामिल हुए ने मेडिटेशन की और श्रीमती मित्तल से प्रश्नों के उत्तर पाकर अपनी आध्यात्मिक जिज्ञासा को शांत किया।











