
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। श्री आत्मानंद जैन सभा द्वारा संचालित एस ए वी जैन डे बोर्डिंग स्कूल ऊना रोड पर आज भगवान महर्षि वाल्मीकि जी के प्रकट दिवस पर एक विशेष असेंबली का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मैडम पलक ने महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन पर अपने विचार प्रकट किए।

जैन शिक्षण निधि के प्रधान जीवन जैन ने अपने भेजे गए संदेश में कहा कि अश्विन माह में पूर्णिमा का दिन महर्षि वाल्मीकि जी के प्रकट दिवस के रूप में मनाया जाता है। त्रेता युग में जन्मे महर्षि वाल्मीकि जी की याद में इस दिन को वाल्मीकि जयंती के रूप में मनाया जाता है। उनका जीवन सद्कर्मों और भक्ति की राह पर चलने का संदेश देता है। कठोर तपस्या के बाद महर्षि वाल्मीकि ने महर्षि पद प्राप्त किया। उन्होंने बताया कि परमपिता भगवान ब्रह्मा के कहने पर उन्होंने भगवान श्रीराम के जीवन पर आधारित रामायण महाकाव्य की रचना की।
सचिव मानिक जैन जी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि भी कहा गया है। संस्कृत साहित्य के प्रथम कवि के रूप में माना जाता है जिन्होंने संसार का पहला श्लोक लिखा। उनका पूर्व नाम रत्नाकर था। वे प्रचेता के पुत्र थे जिन्हें ब्रह्म जी का पुत्र माना जाता है। महर्षि वाल्मीकि जी ज्योतिष विद्या एवं खगोल विद्या के भी प्रकांड विद्वान थे। कैशियर साहिल जैन जी ने कहा कि महर्षि वाल्मीकि ने संस्कृत में रामायण की रचना की जिसमें 24 हजार श्लोक और 7 कांड हैं। लव-कुश को ज्ञान प्रदान करने वाले महर्षि वाल्मीकि ही थे। स्कूल डीन सुनीता दुग्गल, प्रिंसिपल मनु वालिया, सुषमा बाली ने भी महर्षि वाल्मीकि जी के जीवन पर प्रकाश डाला और सबको इस दिन की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर स्कूल स्टाफ और बच्चों ने भगवान बाल्मीकि के चित्र पर अपने पुष्पांजलि प्रकट की |











