Monday, November 2, 2026
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जहां कुछ काम नहीं आता वहां पर आशीर्वाद की पूंजि काम आती हैः राजन जी महाराज

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। श्री बड़े हुनमान जी सेवक संस्था होशियारपुर की तरफ से चेयरमैन व कथा आयोजक पूर्व मेयर शिव सूद एवं प्रधान राकेश सूरी की अगुवाई में करवाई जा रही श्री राम कथा के सातवें दिन की शुरुआत राजन जी महाराज ने सीता राम राम राम, सीता राम राम राम धुनि से की। कथा को आगे बढ़ाते हुए  राजन जी ने कहा कि केवट भाईया को विदा करके भगवान प्रयागराज में भारद्वाज जी के आश्रम में विश्राम करते हैं। अगले दिन प्रभु महार्षि भारद्वाज जी का आशीर्वाद लेकर यमुना जी के पावन तट आए तथा यहां पर उन्होंने निशादराज को विदा किया। इसके बाद प्रभु महर्षि वाल्मीकि जी के आश्रम में पहुंचते हैं तथा इस पर गोस्वामी जी लिखते हैं कि आश्रम का वातावरण बहुत ही सुन्दर और मनोहर होता है। जिसका वह इस दोहे, सरनी सरोज विटप्पन पूले, गुंजत मंजुल, मधुपरस भूले, बिरहित बैर मुदित मन चरहि.., के माध्यम से बहुत ही सुन्दर ढंग से वर्णन किया है।

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उन्होंने बताया कि किसी ने महर्षि को सूचना दी कि जिनका नाम आप जपते हैं वह द्वार पर आए हैं तो वह उठकर दौड़ पड़े। दूसरी तरफ राम जी आश्रम के बाहर खड़े आश्रम की आभा देखकर प्रसंन हो रहे होते हैं तथा जब वह महर्षि को देखते हैं तो लक्ष्मण के साथ उनकी तरफ जाते हैं और उन्हें दण्डवत प्रणाम करते हैं। उन्होंने चौपाई, महर्षि मुनि कहूं राम डंण्डवत कीन्हा, आशीर्वाद विप्रवर दीन्हा, देखि राम छवि नयन जुड़ाने, करि सनमान आश्रम आने, के द्वारा भगवान के आश्रम में आने की कथा का वर्णन किया। महर्षि भगवान को कंदमूल फल अर्पित करते हैं और उसके बाद भगवान थोड़ी देर विश्राम करते हैं। विश्राम करके उठने के बाद भगवान राम महर्षि से बात करते हैं।

भगवान कहते हैं कि महर्षि आप तो त्रिकालदर्शी हैं, आप सब कुछ जानते हैं। महर्षि भगवान से पूछते हैं कि आ यहां वन में कैसे प्रभु। इस पर गोस्वामी जी लिखते हैं कि भगवान कहते हैं कि तात वचन पुनि मात हित, भाई भरत असराज, मो कहूं दर्शन तुम्हार प्रभु, सब मम पुण्य प्रभाव। राम जी कहते हैं कि अगर मैं राजा बन जाता तो आपके दर्शन कैसे करता प्रभु। आपका दर्शन करके मेरा जीवन धन्य हो गया। राम जी महर्षि से कहते हैं कि मुझे ऐसा स्थान बताएं जहां उनके रहने से किसी को कोई कष्ट न हो। इस पर त्रिकालदर्शी वाल्मीकि जी ने, सोई जानेइ जेहि देहु जनाए, जानत तुम्हि तुम्ही होई जाई, से भगवान की महिमा का वर्णन किया। जो भगवान के अनुकूल रहे उसे एक दिन भगवान उसे खुद को जनवा देते हैं। महर्षि कहते हैं कि आप पूछ रहे हैं कि मैं कहां रहूं, तो मैं पूछ रहा हूं कि प्रभु आप कहां नहीं हैं। पहले आप वो स्थान बताइए जहां आप नहीं हैं, फिर मैं आपके रहने का स्थान बताता हूं। यहां पर महर्षि जी ने भगवान के रहने के 14 स्थान बताए हैं। यह स्थान किसी जगह पर नहीं हैं बल्कि हमारे शरीर में हैं अपितु हमारे व्यवहार में हैं। जिनके बारे में महर्षि जी ने बहुत ही सुन्दर ढंग से बताया। इसके बाद भगवान चित्रकूट आए और यहां पर उनका मन रम गया।

राजकुमारों के वन में आने की सूचना पाकर कोलभील वहां आते हैं तो प्रभु को प्रणाम करके कहते हैं, हम सेवक परिवार समेता, नाथनसकुजब आए सुदेता। कोलभील कहते हैं कि प्रभु हम आपकी हर प्रकार से सेवा करेंगे, अब आपको यहां पर डरने की जरुरत नहीं है, क्योंकि हम आपके साथ हैं। इस पर प्रभु कहते हैं कि अब तक तो बहुत डर लग रहा था, लेकिन अब नहीं लगेगा, उनका डर समाप्त हो गया है। राम जी इन कोलभीलों की बात को ऐसे सुन रहे हैं, जैसे पिता अपने पुत्र की बात सुनते हैं। राजन जी वर्णन करते हैं, रामहि केवल प्रेम प्यारा, जानिलेहू जो जानन हारा, राम जी को केवल प्रेम प्रिय है और यह बात सबके लिए नहीं है, जो जानना चाहता है वही जाने। सब जान भी नहीं सकते।

उन्होंने भजन जो प्रेम गलि में आया नहीं, प्रियतम का ठिकाना क्या जाने…, से उपस्थिति को मंत्रमुग्ध कर दिया और भाव एवं प्रभु प्रेम की परिभाषा को समझाया।  कथा के दौरान राजन जी ने मारकण्डे ऋषि की कथा सुनाई और बताया कि उऩकी उम्र बहुत कम थी तथा दण्डवत करने की उनकी आदत ने उन्हें पहले नारद जी से और बाद में ब्रह्माजी से चिंरजीवी का आशीर्वाद दिलाया था। इसलिए अपने बच्चों को संतजनों एवं बड़ों को प्रणाम व दण्डवत करने की आदत डालें। क्योंकि जहां कुछ काम नहीं आता वहां पर आशीर्वाद की पूंजि काम आती है।

इस मौके पर महर्षि भृगु वेद विद्यालय के बच्चों द्वारा वैदिक मंगलाचरण का गायन किया है। जिसे राजन जी ने बहुत सराहा और बच्चों को अपनी संस्कृति से जोड़ने का संदेश दिया।

इस मौके पर महापुरुषों में स्नेहमयी मां स्नेह अमृतानंद जी भृगु शास्त्री, स्वामी कृष्णानंद जी महाराज गौसेवा मिशन राष्ट्रीय अध्यक्ष, संत बाबा रणजीत सिंह जी गुरुद्वारा शहीद सिंघां, बाबा अवतार नाथ जी चठियालियां वालों ने विशेष तौर से पहुंचकर कथा श्रवण की और श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया।

इस मौके पर पूर्व सांसद अविनाश राय खन्ना, पूर्व मंत्री सुन्दर शाम अरोड़ा, डा. कुलदीप नंदा, विधायक डा. ईशांक, राम गोपाल संयोजक पंजाब धर्म जागरण मंच, जिला प्रचारक रविल, पार्षद लवकेश ओहरी, पूर्व चेयरमैन एडवोकेट राकेश मरवाहा, पूर्व डीएसपी रविंदर कुमार, शिव कुमार शर्मा विशेषातिथि के रुप में उपस्थित हुए और राजन जी महाराज ने उन्हें सम्मानित किया।

इस मौक पर मुख्य यजमान व्रिजेश चंद्र विजय व प्रभा रश्मि के अलावा दैनिक यजमानों में डा. आशीष सरीन व श्वेता सरीन, सचिन बस्सी व प्रीति बस्सी, प्रितपाल सिंह व जसपाल कौर, हरनीर सिंह, जसलीन कौर, रोहित खुल्लर, खुशबू खुल्लर, कार्तिक खुल्लर, गौरव अग्निहोत्री, रमेश टड्ढा, राकेश चड्ढा, नीतु चड्ढा, मोहित सैनी व शिफाली सैनी, रमेश गुप्ता व प्रीति गुप्ता, रिव अरोड़ा व ममता अरोड़ा, मुस्कान अरोड़ा, सुशील पडियाल व शोभना पडियाल, संयुक्त कमिशनर संदीप तिवारी व सुनीता तिवारी, ईशा तिवारी, राजीव सूद व डेजी सूद, आदित्य सूद, डा. इशिता सूद, पं. मुनीष गौड़ व कविता गौड़, श्रुति गौड़ ने पूजन किया और महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर अन्य के अलावा संस्था की तरफ से महामंत्री प्रदीप हांडा, प्रचार सचिव अश्वनी शर्मा, कोषाध्यक्ष विपिन वालिया, प्रशांत कैंथ, कपिल हांडा, अनमोल सूद, गौरव शर्मा, शुभांकर शर्मा, अंकुश, अशोक सेठी, पं. दीपक शास्त्री, पंकज बेदी, मनी गोगिया, पंडित दर्शन लाल काका सहित अन्य सदस्यगण एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा श्रवण की।

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