
राजस्थान (द स्टैलर न्यूज़)। अरावली पर्वतमाला उत्तर पश्चिम भारत में एक पर्वत श्रृंखला है। ये पर्वत श्रृंखला दिल्ली के नजदीक से शुरू हो कर, हरियाणा, राजस्थान होते हुए गुजरात तक फैली हई है। इसकी सबसे ऊंची चोटी राजस्थान में माउंट आबू स्थित ‘गुरु शिखर’ है। उत्तर अरावली पर्वतमाला के कारण दिल्ली और हरियाणा की जलवायु आर्द्र उपोष्णकटिबंधीय है। इसके कारण दिल्ली में ग्रीष्मकाल में बहुत गर्मी और शीतकाल में बहुत ठंड पड़ती है। अरावली पर्वत श्रृंखला भारत की महान हरित दीवार (ग्रेट ग्रीन वॉल ऑफ अरावली) है। पर्यावरण के दृष्टिकोण से ये एक संवेदनशील क्षेत्र है। ये पर्वत एक तरह से दिल्ली के लिए वरदान है। जब राजस्थान के रेगिस्तान से धूल भरी गर्म हवाएं दिल्ली की और आती हैं तो ये पर्वत इनके सामने प्राकृतिक अवरोध बनकर खड़ा हो जाता है।

जब तक अरावली पर्वत राजस्थान से आने वाली धूल भरी आंधी को रोकता रहा, दिल्ली की सेहत ठीक रही। लेकिन, जब से अरावली का पारिस्थितिकी संतुलन खराब हुआ है, दिल्ली का दम घुटने लगा है। अब तो प्रदूषण जानलेवा स्तर पर पहुंच चुका है। अरावली, धरती की वो हैं पहाड़ियां, जो करीब 2.5 अरब साल से भारत के बड़े हिस्से को रेगिस्तान से तपने से बचा रही हैं। जब थार की गर्म हवाएं भारत की छाती से टकराती हैं तब अरावली ही थार को थामे खड़ी रहती है। दुनिया की सबसे पुरानी पर्वत श्रृंखलाओं में शुमार अरावली अब संकट में है। सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2025 के फैसले के बाद शुरू हुआ #SaveAravalli अभियान तेजी से फैल रहा है। जानकारी मुताबक 20 नवंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की कमेटी की सिफारिशें स्वीकार की। इसके तहत अब केवल 100 मीटर से अधिक ऊंचाई वाली संरचनाओं को ही ‘अरावली हिल’ माना जाएगा। आलोचकों का कहना है कि इससे अरावली का 90 प्रतिशत हिस्सा संरक्षण के दायरे से बाहर हो जाएगा। कोर्ट ने नए खनन लीज पर रोक लगाई है और सस्टेनेबल माइनिंग प्लान बनने का आदेश दिया है।
लेकिन कई लोग मानते हैं कि यह परिभाषा खनन लॉबी को फायदा पहुंचाएगी। कांग्रेस नेता अजय माकन ने भी इसे जलवायु संकट बताया है। 11 दिसंबर 2025 को अंतरराष्ट्रीय पर्वत दिवस पर पर्यावरणविदों और नागरिक समूहों ने ‘अरावली विरासत जन अभियान’ शुरू किया। यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के जवाब में लॉन्च हुआ। लोग अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदलकर मुहिम से जुड़ रहे है। सेव अरावली ट्रस्ट जैसे संगठन लंबे समय से पेड़ लगाने और जागरूकता फैलाने का काम कर रहे है। अब यह अभियान सड़कों तक पहुंच गया है। गौरतलब है कि जून 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट’ लॉन्च किया। यह अफ्रीका की ग्रेट ग्रीन वॉल से प्रेरित है। इसका उद्देश्य अरावली के आसपास हरी पट्टी बनाना, जलाशयों को बहाल करना और जैव विविधता बढ़ाना है। ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान को भी इससे जोड़ा गया है। सेव अरावली अभियान की मुख्य मांग है कि अरावली की परिभाषा ऊंचाई की बजाय पर्यावरणीय महत्व के आधार पर हो।











