
आपने कई बार देखा होगा कि अकसर ही ऐसी वीडियो सामने आ जाती हैं कि सड़क पर कोई भीड़ भी नहीं थी और कोई तेजी से भी नहीं जा रहा था तो भी कुछ लोगों के वाहन आपस में टकरा गया और उसके पीछे का कारण यह बताया जाता है कि एक सुन्दर लड़की सड़क से गुजर रही थी और सभी की नज़र उस पर थी, जिसके चलते वह आपस में भिड़ गए।

स्टैलर चुटकी
ऐसा ही कुछ इन दिनों पंजाब में कार्यरत एक सरकारी समाज सेवी संस्था में देखने को मिल रहा है, जिसके एक विशेष मेहमान के कारनामे इन दिनों खासे चर्चा का विषय बने हुए हैं। चर्चा हो भी क्यों न, जब कोई विशेष सदस्य किसी फीमेल फैकीलिटी को बीच सड़क में रोककर उससे घंटो बतियाए, और उनके फेस इम्प्रैशन को देखकर कोई अंजादा भी न लगा सके कि वे किस तरह की बातें कर रहे होंगे तो शायद इसे बेमाइने कहा जाएगा। जी हां! एक समय था जब एक संस्था जो सरकारी कहलाती है में गड़बड़ी को लेकर चर्चाओं का बाजार काफी गर्म रहा था, में इन दिनों एक विशेष कृपापात्र सदस्य जोकि इन दिनों एक अच्छे खासे पद पर आसीन है के द्वारा एक फीमेल फेकीलिटी पर डोरे डाले जाने तथा फीमेल फेकीलिटी द्वारा भी उसे लाइन दिए जाने के संबंध में रह-रह कर चर्चाएं सामने आ रही हैं। ऐसी शायद इसलिए कि किसी ने उन्हें घंटों सड़क पर खड़े रहकर एक दूसरे का दुख बांटते हुए देख लिया था और उनकी बेशर्मी देखिए कि वह दुनिया दारी की शर्म से परे एक दूसरे पर प्यार लुटाते नहीं थक रहे थे।
आपको बता दें कि अगर कोई वर्कर किसी संस्था या फर्म में काम करता या करती है तो अगर फर्म या संस्था के किसी विशेष अधिकारित सदस्य को किसी फीमेल या मेल वर्कर से बात करनी हो तो वह कार्यालय में बुलाकर करता है, परन्तु उसे घंटों सड़क पर लेकर खड़े होने का तो कोई सवाल ही पैदा नहीं होता। ऐसे में कहा जा सकता है कि संस्था में कुछ तो गड़बड़ चल रही है। वो भले ही फाइनांस को लेकर हो या फिर दिललगी को लेकर। लेकिन जिस उद्देश्य से संस्था बनाई गई थी, उन उद्देश्यों का क्या। इससे किसी को क्या लेना देना, वो कहते हैं न, जब दिल आया गधी पर तो परी क्या चीज है। अरे आप तो बुरा मान गए। मेरा मतलब है जब दिल मिल गया तो फिर नौकरी और अधिकारी क्या चीज हैं। अरे आप फिर बुरा मान गए, मेरा मतलब है जब बेशर्मी की हद जब पार हो ही गई तो फिर किसी से क्या डर। वैसे एक बात बताऊं, यह भी पता चला है कि जो सदस्य महिला फेकिलीटी के साथ खड़ा था उसकी औलाद की उम्र शायद मोहतरमा से अधिक हो, परन्तु प्यार में अंधे हुए सदस्य और फेकीलिटी द्वारा सड़क पर घंटों बातें करने की चर्चाओं ने नई ही तरह के विवाद और रोमांस को जन्म दे दिया है। अब देखना यह होगा कि आखिर इन दोनों का प्यार या तकरार किस स्टेज तक पहुंचकर विश्रामित होता है या फिर शहर निवासियों को ऐसे नजारे देखने को अकसर ही मिलते रहेंगे। वैसे एक बात है कोई मजे के लिए तो कोई स्वार्थ की पूर्ति व मजे के लिए। समझ गए न।
क्या, कौन सी संस्था है, कहां की है, और विशेष सदस्य जोकि विशेष पद पर आसीन हैं का क्या नाम है, शहर कौन सा है और तो और किसी अधिकारी का नाम ही बता दो…। भाई साहब मैं कितनी बार कह चुका हूं कि मैं एक छोटा सा पत्रकार हूं, आज के जमाने में डर-डर के समय काट रहा हूं, ये तो आपका प्यार है जो मुझे लिखने को मजबूर करता है। बरना मेरी मजाल क्या। मुझे पता है आप बहुत समझदार हैं और समझ भी गए होंगे। मुझे दें इजाजत। जय राम जी की।












