
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। सदगुरुदेव चमन लाल जी महाराज की अनुकंपा से चार दिवसीय व्यास पूजा महोत्सव आज योग भवन डगना रोड पर शुरू हुआ। हवन आरती के उपरांत भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने कहा कि हम अपनी भारतीय संस्कृति के सर्वोत्तम पर्व को मनाने के लिये तथा गुरु महाराज का आशीर्वाद लेने के लिए इस समागम में आए है। उन्होंने कहा कि जिन पर गुरु की कृपा होती है वही ऐसे कार्यक्रम में आते है। जिस स्थान पर प्रभु की ज्योति जगती है हम पूजा करते है वही तीर्थ है। उन्होंने हमें जो शिक्षा दी हम उन का पालन करते हैं। हमारे सदगुरु देव जी ने साठ साल इस स्थान पर तप किया।

उन्होंने सांसारिक सुबिधाओं का भी उपयोग नहीं किया। प्रातः 4 बजे उठ कर वह भक्तों को योग सीखाते थे। बीमार अवस्था में अस्पताल में होते हुए भी वह कहते थे कि मुझे आश्रम ले चलो मैने योग सीखाना है। उन्होंने कहा कि भगवान का कोई नाम नहीं होता उनका सांसारिक नाम जरूर हो सकता है। संपूर्ण योगी गुरु का शिष्य संपूर्ण ही बनेगा। हमारे महाराज जी के यम नियम परिपक्व थे। उन्होंने कहा कि गुरु परंपरा आदिकाल से भारत में चली आ रही है। जब संसार का संतुलन बिगड़ता है तो वह किसी न किसी रूप में आते है। जो व्यक्ति योग करते देह त्यागता है उसे अगला जन्म योगियों के घर में मिलता है। वही सत्संग में आते है। हमारा जीवन संसार की माया में लिप्त है सतगुरु महाराज ने अपने गुरु कों प्राप्त करने के लिए बहुत तपस्या की। प्रभु राम लाल जी ने गुरु प्राप्ति के लिय बहुत खोज की।
गुरु प्राप्ति के लिय तो चाहे जान चली जाए तो कोई बड़ी बात नहीं। गुरु ने जो दीक्षा में शिक्षा दी उस का हम पालन करें। दीक्षा गुरु चरणों में युक्ति होती है। स्कूल में सात दिन नहीं जाते तो नाम कट जाता है ऐसे ही अगर गुरु के पास उनके धाम नहीं जाते तो हमारा संबंध कमजोर हो जाता है। गुरु ने जो एक बार बोल दिया उसका पालन हर हाल में करना चाहिए। तभी हम उनके शिष्य कहला सकते है।











