
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। गांव बस्सी गुलाम हुसैन एक बार फिर से चर्चा में है। एक तरफ जहां लोकसभा चुनाव के चलते राजनीतिक सरगर्मियां तेज हैं वहीं इस गर्मी में गांव बस्सी गुलाम हुसैन का माहौल और गर्मा गया है, क्योंकि वहां पर स्थित दशमेश क्लिनिक पर 18 अप्रैल को स्वास्थ्य विभाग एवं एस.डी.एम. कार्यालय से फ्लाइंग स्कवायड की टीम द्वारा छापा मारा गया था, क्योंकि पता प्रशासन को सूचना मिली थी कि उक्त क्लीनिक को गैरकानूनी ढंग से चलाया जा रहा है तथा गत वर्ष भी उक्त दुकान पर छापामारी दौरान वहां से 40 से अधिक प्रकार की बिना बिल व प्रतिबंधित दवाएं मिलने संबंधी कार्रवाई को अंजाम दिया गया था। पिछले दिन की गई कार्रवाई में ड्रग इंस्पैक्टर परमिंदर सिंह के अलावा फ्लाइंड स्कवायड टीम के सदस्य एवं पुलिस भी शामिल थी। इस दौरान वहां से किसी भी तरह की प्रतिबंधित दवाई नहीं मिली। मगर, क्लीनिक चलाने वाले के पास से डा. रवजोत का लाइसेंस एवं उनके नाम के बिल मिलने से मामला शंका के घेरे में आ गया।

क्लीनिक पर टीम द्वारा कार्रवाई किए जाने के विरोध में क्लीनिक संचालक लाल सिंह के कुछ समर्थक वहां आ पहुंचे और उन्होंने टीम का जमकर विरोध जताया। विरोध जब ज्यादा बढ़ गया तो वहां मौजूद क्लीनिक संचालक लाल सिंह ने टीम को आम आदमी पार्टी के लोकसभा हल्का होशियारपुर के प्रत्याशी व सीनियर नेता डा. रवजोत सिंह का लाइसेंस एवं उनके नाम के बिल दिखाते हुए बताया कि यह क्लीनिक डा. रवजोत का है और वे ही मरीजों की जांच करते हैं। इस पर जब मौके पर डा. रवजोत को बुलाया गया तो उन्होंने क्लीनिक उनकी होने की बात कही। जिसके बाद टीम जरुरी कागजात व कार्रवाई करते हुए वहां से चली गई। डा. रवजोत द्वारा क्लीनिक पर आने की बात जैसे ही गांव व आसपास के इलाके में फैली तो लोगों इस बात की चुटकी लेने लगे कि डा. रवजोत को गांव में आते नहीं तो उन्होंने कैसे कह दिया कि वे गांव में आते हैं। इसी दौरान क्लीनिक संचालक लाल सिंह और उनके समर्थकों की गांव के कुछ लोगों के साथ इस बात को लेकर कहासुनी हो गई कि क्लीनिक पर छापा उन्होंने डलवाया है। मामला इतना बढ़ गया कि नौबत हाथापाई तक पहुंच गई और लाल सिंह व उनके समर्थकों ने एक युवक पर तेजधार हथियार से हमला करके उसे घायल कर दिया। जिसे सिविल अस्पताल ले जाया गया। घायल की पहचान नरेश कुमार पुत्र सुरिंदर कुमार के रुप में हुई। अस्पताल से उसे उपचार के बाद छुट्टी दे दी गई। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरु कर दी है।
दूसरी तरफ डा. रवजोत के गांव में आने की खबर को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। मौजूदा पंचायत का कहना है कि उन्होंने पिछले लंबे समय से डा. रवजोत को गांव में नहीं देखा और न ही वे क्लीनिक पर आते हैं। सरपंच नरवीर सिंह नंदी ने भी इस बात की पुष्टि की कि डा. रवजोत को गांव में व उक्त क्लीनिक पर नहीं देखा। इतना ही नहीं पूर्व सरपंच प्रेम भारद्वाज ने भी कहा कि उन्होंने डा. रवजोत को गांव में कभी नहीं देखा। उन्होंने बताया कि एकाध बार मैडीकल कैंप में डा. रवजोत जरुर आए थे।
इस मामले में बात करने पर डा. रवजोत सिंह ने कहा कि वे सप्ताह में एक-दो बार क्लीनिक पर जाते हैं। जब उनसे पूछा गया कि उनकी गैरमौजूदगी में कोई अनक्वालिफाइड व्यक्ति क्लीनिक चला सकता है तो उन्होंने कहा कि रोटीन सैंपलिंग होती है तथा बिल व लाइसेंस उनका ही है। उन्होंने कहा कि अगर उनकी गैरमौजूदगी में मरीजों की जांच वगैरा की जाती है तो वह इस बारे में पता करके जरुरी कदम उठाएंगे।
ड्रग इंस्पैक्टर परमिंदर सिंह ने कहा कि उन्हें जो बिल एवं लाइसेंस मिला वह डा. रवजोत सिंह के नाम पर था और मौके पर डा. रवजोत सिंह ने वहां पहुंचकर इस बात की पुष्टि की। जहां तक लाइसेंस पर किसी अन्य के प्रैक्टिस करने का सवाल है तो इस संबंधी कोई भी कार्रवाई मैडीकल कौंसिल कर सकती है, इस पर कार्रवाई उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
मारपीट मामले में थाना सदर पुलिस के अनुसार उनके पास मामले की जानकारी पहुंच गई है तथा जांच शुरु कर दी गई है।
अब सवाल यह उठता है कि एक क्लीनिक संचालक जिस पर पहले भी स्वास्थ्य विभाग व प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई हो, उसे डा. रवजोत द्वारा संरक्षण क्यों दिया गया, जबकि इससे पहले उक्त व्यक्ति को भाजपा नेताओं का आशीर्वाद प्राप्त था और विभाग वाले सब कुछ जानते हुए भी कभी जांच हेतु गांव में क्यों नहीं गए। अब सवाल यह भी उठता है कि अगर डा. रवजोत गांव में जाते हों तो लोगों ने उन्हें क्यों नहीं देखा और पंचायत को इस बारे में जानकारी क्यों नहीं है। क्योंकि, डा. रवजोत सिंह कोई आम इंसान नहीं बल्कि राजनीतिक शख्शियत होने के कारण वह काफी लोकप्रिय हैं और लगभग हर व्यक्ति उन्हें जानता है।
यह एक मात्र ऐसा क्लीनिक नहीं है जहां पर अनक्वालिफाइड डाक्टरी करने वाले लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं बल्कि आसपास के गांवों में ऐसे कई झोलाछाप डाक्टर हैं जो राजनीतिक संरक्षण के चलते अपनी दुकानदारी चला रहे हैं।












