Tuesday, October 20, 2026
Home Latest जब कुत्ते टीटो के लिए रतन टाटा ने छोड़ दिया था ब्रिटेन...

जब कुत्ते टीटो के लिए रतन टाटा ने छोड़ दिया था ब्रिटेन का अवार्ड

नई दिल्ली (द स्टैलर न्यूज़)। देश के सबसे बड़े उद्योगपति रतन टाटा ने 86 साल में आखिरी सांस ली। रतन टाटा 1990 में रतन टाटा ग्रुप के चेयरमैन बने थे। इसके बाद 22 साल तक यानी साल 2012 तक वह इस पद पर बने रहे। रतन टाटा को न केवल एक सफल उद्योगपति का नाम से बल्कि दयालुपन और परोपकार के लिए जाना जाता है और रहेगा। उनके जीवन का एक किस्सा आपके साथ सांझा करने जा रहे है, हो सकता है कि इस किस्से के बारे में कई लोगों को पता हो, लेकिन जिन्हें नहीं पता है उन्हें भी रतन टाटा की दयालुता और परोपकार के बारे में पता होना चाहिए।

Advertisements

हुआ यूं कि, एक बार उन्होंने अपने बीमार कुत्ते के पास रहने के लिए शाही पुरस्कार समारोह को छोड़ने का फैसला किया। साल 2018 में ब्रिटेन के तत्कालीन प्रिंस चार्ल्स III ने लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड देने के लिए बंकिंघम पैलेस में इनवाइट किया था। इसके लिए एक पूरा समारोह भी आयोजित किया गया था। रतन टाटा ने प्रिंस चार्ल्स के अनुरोध को स्वीकार किया और लंदन आने के लिए तैयार हो गए। लेकिन हुआ कुछ ऐसा जिस वजह से वह अवार्ड लेने नहीं गए।

जिसके बाद सुहेल सेठ उनका किस्सा लोगों के साथ शेयर किया। एक वीडियों में सुहेल सेठ ने बताया कि प्रतिष्ठित उद्योगपति के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम के लिए लंदन पहुंचने पर उन्हें टाटा की ओर से 11 मिस्ड कॉल मिले। कॉल का जवाब देने पर टाटा ने बताया कि उनका एक कुत्ता, टैंगो या टीटो, गंभीर रूप से बीमार हो गया है। उन्होंने कहा कि मैं उसे छोड़कर नहीं आ सकता। सेठ के समारोह में शामिल होने के आग्रह के बावजूद, टाटा दृढ़ रहे और अपने प्यारे पालतू जानवर की देखभाल के लिए शाही सम्मान को त्यागने का फैसला किया।

जब इस बात का पता प्रिंस चार्ल्स को लगा तो वह रतन टाटा के मुरीद बन गए। उन्होंनें प्रशंसा करते हुए कहा कि इंसान ऐसा ही होना चाहिए, रतन टाटा कमाल के इंसान हैं। रतन टाटा कुत्तों से बहुत प्यार करते थे और जानवरों के प्रति उनका प्यार उनके परोपकारी कार्यों के ज़रिए साफ़ झलकता था।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here