Tuesday, October 20, 2026
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भगवान ने हमें जो दिया है उसे संसार में कोई नहीं दे सकता: आचार्य चंद्र मोहन जी

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। योग साधन आश्रम मॉडल टाउन में रविवार के सत्संग के दौरान भक्तों का मार्गदर्शन करते हुए मुख्य आचार्य चंद्र मोहन जी ने सद्गुरु देव श्री चमन लाल जी की शिक्षाओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान ने हमें जो दिया है उसे संसार में कोई नहीं दे सकता। इस बात पर हमें पूर्ण विश्वास होना चाहिए।  उन्होंने कहा कि प्रभु रामलाल जी ने हमें योग दिया जो संसार से लुप्त हो चुका था।  उन्होंने संपूर्ण योग दिया। जिसका लक्ष्य हमारा संपूर्ण विकास है।  ताकि इस जन्म में हम सब कुछ प्राप्त करके अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सके।  उन्होंने कहा कि हमारा शरीर है।  हम चाहते हैं कि यह स्वस्थ, निरोग तथा दीर्घायु रहे।  इसके लिए हठ योग के साधन दिए हैं जो गृहस्थ में रहकर हम आसानी से कर सकते हैं। हमारा फर्ज है कि हम उन्हें प्रतिदिन करें।  जो मनुष्य जन्म से लेकरअंत तक प्रतिदिन एक घंटा योग नहीं करता वह सुखी नहीं रह सकता।  हम भविष्य की तरफ नहीं देखते। अगर हम आज सुखी हैं तो जरूरी नहीं कल भी सुखी रहेंगे।  एक चींटी भी वर्षा काल के लिए भोजन जमा करके रखती है।  हमें भी समय रहते योग को अपनाना चाहिए।  उन्होंने कहा कि मन के लिए राजयोग दिया है।  इसमें यम नियम बताए गए हैं। 

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हम सत्य पर चलें तो मन शुद्ध रहेगा।  लेकिन हम इसका पालन नहीं करते इसीलिए मन अशांत रहता है। तीसरा अंग बुद्धि है।  इसके लिए स्वाध्याय दिया है।  हमारे पास कई शास्त्र हैं। इनको बार-बार पढ़ना चाहिए। चौथी चीज आत्मा है।  गीता में कहा है कि अपनी आत्मा का उद्धार करो।  कोशिश करो की आत्मा गिरे नहीं।  इसके लिए हमें प्रयास करना होगा।  हमारे शरीर में जो आत्मा है वह बंधन में पड़ी हुई है।  बंधन माया से पैदा होते हैं।  सतोगुण रजोगुण और तमोगुण आत्मा को बांधे रखते हैं। यह प्रकृति के ही गुण है।  इनसे छुटकारा पाना होगा।  अपने अंदर सतों गुण पैदा करें। ताकि हम आगे चलकर अच्छी योनि को प्राप्त कर सके।  रजोगुण वाले संसार की चीजों से बंधे रहते हैं। इस से हम जहाँ हैं वहीं रह जाते हैं,  प्रगति नहीं कर पाते। सतोगुण के बारे में कहते हैं कि यह निर्मल है, इसमें दोष नहीं है, यह प्रकाशमई है।  पर इससे जो सुख मिलता है वह भी हमें बांधता है।  रजो गुण में राग है।  इससे तृष्णा व संगति पैदा होती है जो हमें बांधकर रखती है।  तामसिक गुण अज्ञान से पैदा होता है।  जो हमें मोह में डालता है। सब मनुष्य इसमें बंधे हुए हैं।  इसलिए हमें समय रहते योग को अपनाना होगा ताकि हम अपनी आत्मा का उद्धार कर सके। 

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