
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। वातावरण को हरा भरा करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा एक पेड़ मां के नाम से अभियान शुरु किया गया है तथा इसमें हर विभाग को पेड़ लगाने का लक्ष्य दिया गया था। जिसके तहत लगभग सभी विभागों ने अपना लक्ष्य पूरा करते हुए एक पेड़ मां के नाम लगाकर रिपोर्ट अपने ऊपर के अधिकारियों को भेज दी है, लेकिन शिक्षा विभाग के लिए यह अभियान सिर दर्द नहीं बल्कि कमर का दर्द बनता नज़र आ रहा है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार मिले टारगेट से काफी पीछे चल रहे शिक्षा विभाग की हालत यह है कि लक्ष्य पूरा करने के लिए अधिकारियों को अपने निम्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों को पुरानी फोटो अपलोड करके किसी न किसी तरह से लक्ष्य तक पहुंचने की कवायद करने हेतु निर्देश जारी किए जा रहे हैं। अगर शिक्षा विभाग का यह हाल है तो आसानी से समझा जा सकता है कि अन्य विभागों ने लक्ष्य की प्राप्ति कैसे की होगी।

विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार विभाग के एक बड़े अधिकारी द्वारा अपने आधीन अधिकारियों को निर्देश जारी किए गए हैं कि जल्द से जल्द एक पेड़ मां के नाम का लक्ष्य प्राप्त करने हेतु मुहिम में तेजी लाई जाए और पुराने फोटो अपलोड करके आंकड़ा बढ़ाया जाए ताकि इसकी कमी से पैदा होने वाले संभावित खतरे यानि कि विभागीय कार्यवाही से बचा जा सके। सरकार द्वारा इस अभियान के तहत विभागों को खासकर शिक्षाविभाग को अधिक से अधिक पेड़ लगाने के निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन निर्देश जारी करने वाले उच्चाधिकारियों ने यह नहीं सोचा कि जिनके पास जगह है वह तो पेड़ लग लेंगे, लेकिन जिनके पास जगह नहीं है वह पेड़ क्या स्कूल या घर की छतों पर लगाएंगे। जिसके चलते बहुत सारे स्कूल ऐसे हैं, जिन्होंने गांव या शहीर क्षेत्र में खाली पड़ी जगह पर पेड़ तो लगाए, लेकिन लक्ष्य की प्राप्त करने से इसलिए चूक गए, क्योंकि उनके पास पेड़ लगाने के लिए जगह ही नहीं बची। इसके चलते लक्ष्य की प्राप्ति से चूक संभव है।
सूत्रों की मानें तो इस अभियान के तहत अधिकारी वर्ग पर इतना दवाब है कि उनके लिए जैसे तैसे लक्ष्य की प्राप्ति ही एक मात्र साधन बचा है। जिसके चलते उनके द्वारा अपने अधीन अधिकारियों को जैसे तैसे फोटो अपलोड करके जान बचाने की बात कही जा रही है। जिनके पास जगह है वह तो कर रहे हैं, अन्यों के लिए यह सिर का दर्द अब कमर का दर्द बना चुका है तथा एक अधिकारी द्वारा दिए गए निर्देशों की आडीयो भी काफी वायरल हो रही है। अब देखना यह होगा कि इस अभियान को लेकर विभाग में पैदा हुई यह समस्या कैसे खत्म होती है और उच्चाधिकारियों का इसे लेकर क्या रुख रहता है।












