
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। जिला शिक्षा अधिकारी (सेकेंडरी एवं एलीमेंट्री) ललिता अरोड़ा अपनी 34 साल 4 महीने की लंबी व गौरवमयी सरकारी सेवा के बाद 31 अक्टूबर को सेवा मुक्त हो रही हैं।

ललिता अरोड़ा का जन्म 29 अक्तूबर 1966 को बरनाला में हुआ। उनके माता-पिता धार्मिक प्रवृत्ति के होने के साथ-साथ समाज सेवा में अग्रणी रहे। परिवार के संस्कारों ने उनमें भी समाज के लिए कुछ अच्छा करने का जज़्बा पैदा किया। उनकी पहली नियुक्ति संगरूर में हुई, जिसके बाद उन्होंने होशियारपुर के ढड्डे फतेह सिंह और फिर सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रेलवे मंडी, होशियारपुर में अपनी सेवाएँ दीं। तत्पश्चात उन्हें प्रिंसिपल के पद पर पदोन्नत किया गया और उनकी पहली नियुक्ति सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, वोहन में हुई। बाद में वह पुनः सरकारी कन्या सीनियर सेकेंडरी स्कूल, रेलवे मंडी में प्रिंसिपल के रूप में तैनात रहीं।
जनवरी 2024 में विभाग द्वारा उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी के रूप में पदोन्नत किया गया। उनकी पहली पोस्टिंग लुधियाना में हुई, जहाँ उन्होंने अपने उत्कृष्ट कार्य से सभी का दिल जीत लिया। उन्होंने लुधियाना को एनरोलमेंट में पूरे पंजाब में प्रथम स्थान पर पहुँचाया, जिसके लिए शिक्षा मंत्री ने भी उनकी कार्यशैली की सराहना की। इसके बाद उनका तबादला होशियारपुर हुआ, जहाँ उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी का दायित्व सफलतापूर्वक निभाया। मार्च माह में उन्हें सेकेंडरी के साथ-साथ एलीमेंट्री का कार्यभार भी सौंपा गया, जिसे उन्होंने पूरी निष्ठा और लगन से संभाला। उनके कार्यकाल के दौरान सी.ई.पी. में होशियारपुर जिला तीसरे स्थान पर रहा, जो उनकी मेहनत और नेतृत्व क्षमता का परिणाम था।
प्रिंसिपल रहते हुए उन्होंने रेलवे मंडी स्कूल की इमारत का कायाकल्प कर दिया। करोड़ों रुपये की लागत से कच्चे कमरों को पक्का करवाया, साइंस लैब स्थापित की और स्कूल को जिले का पहला मनपसंद स्कूल बनाया — जहाँ विद्यार्थियों के लिए दाखिला लेना गर्व की बात समझी जाने लगी। उनके जिले के सभी जिलाधीशों और अधिकारियों से मधुर संबंध रहे। रेलवे मंडी स्कूल के हर कार्यक्रम में उनकी उपस्थिति विशेष रहती थी और बाद में भी उन्होंने जिला स्तर के कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर योगदान दिया।
उनकी शादी प्रिंसिपल तेजिंदर सिंह के साथ हुई। उनकी दो बेटियाँ हैं — एक डॉक्टर और दूसरी आईटी इंजीनियर। उनका दामाद न्यूरोसर्जन (एम.सी.एच.) है।
आज भले ही ललिता अरोड़ा सेवा मुक्त हो रही हैं, लेकिन उनका कहना है — “मेहनत और सेवा का सफर कभी खत्म नहीं होता।” वह आगे भी समाज की भलाई और शिक्षा के क्षेत्र में अपनी सेवाएँ देती रहेंगी।












