
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ मानवाधिकार आयोग के सदस्य पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने कहा कि गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना भी मानवाधिकारों की सुरक्षा का अहम हिस्सा है। इसी दिशा में आयोग द्वारा एक महत्वपूर्ण सलाह जारी की गई है, जिसके तहत अब 112 नंबर पर कॉल कर गंभीर मरीजों को अस्पताल ले जाने वाली एंबुलेंस के लिए पुलिस पायलट उपलब्ध करवाया जाएगा। इससे एंबुलेंस को ट्रैफिक से राहत मिलेगी और मरीज को कम समय में अस्पताल तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।

पद्मश्री शंटी रविवार को होशियारपुर के जिला प्रशासकीय कांप्लेक्स में मानवाधिकार जागरूकता और शिकायतों के निवारण के लिए आयोजित खुली सुनवाई कैंप के दौरान अधिकारियों और सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग का उद्देश्य केवल शिकायतों का निपटारा करना ही नहीं बल्कि मानवाधिकारों के प्रति लोगों में व्यापक जागरूकता पैदा करना भी है। जिला प्रशासकीय कांप्लेक्स में पहुंचने पर पंजाब पुलिस की टुकड़ी की ओर से उन्हें गार्ड आफ आनर भी दिया गया।
बैठक को संबोधित करते हुए जतिंदर सिंह शंदी ने बताया कि आयोग द्वारा मानवाधिकार उल्लंघन से जुड़ी शिकायतों के लिए व्हाट्सएप नंबर 9855475547 जारी किया गया है। यदि किसी भी व्यक्ति के मानवाधिकारों का हनन होता है तो वह इस नंबर पर लिखित शिकायत भेज सकता है, जिस पर आयोग द्वारा दो दिनों के भीतर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस अवसर पर जिला प्रशासनिक कॉम्प्लेक्स में आयोजित बैठक में मेयर सुरिंदर कुमार, सीनियर डिप्टी मेयर प्रवीन सैनी, डिप्टी मेयर रंजीता चौधरी, अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (सामान्य) निधि कुमुद बंबाह, नगर निगम कमिश्नर ज्योति बाला मट्टू, एआईजी-कम-सुपरिटेंडेंट केंद्रीय जेल सतनाम सिंह, एसपी नवनीत कौर, एस.डी.एम होशियारपुर अमनदीप कौर घुम्मण, एस.डी.एम. दसूहा कंवलजीत सिंह, एस.डी.एम मुकेरियां ज्योतसना, एस.डी.एम गढ़शंकर परमप्रीत सिंह, एस.डी.एम टांडा लवप्रीत सिंह, सहायक कमिश्नर गुरप्रीत कौर, सिविल सर्जन डा. मंदीप कमल के अलावा पुलिस अधिकारियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी और सामाजिक सेवा संस्थाओं (एनजीओज) के प्रतिनिधि मौजूद रहे। बैठक के दौरान पीड़ितों की शिकायतें भी सुनी गईं और उनके समाधान के लिए अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए गए।
पद्मश्री जतिंदर सिंह शंटी ने बताया कि आयोग राज्य के सभी जिलों में कोर ग्रुप स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रहा है, जिसमें सामाजिक सेवा संस्थाओं के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही हर जिले में आयोग की एक शाखा स्थापित करने की योजना है, ताकि पीड़ितों को जल्द न्याय मिल सके। उन्होंने कहा कि इस तरह सभी जिलों में कोर ग्रुप बनाने वाला पंजाब देश का पहला मानवाधिकार आयोग बनने जा रहा है।
उन्होंने अधिकारियों को मानवाधिकारों के संरक्षण से जुड़े विभिन्न निर्देशों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने को कहा। आयोग द्वारा जारी दिशानिर्देशों के अनुसार अब कोई भी सरकारी या निजी अस्पताल बिल का भुगतान न होने की स्थिति में मरीज या मृतक के शव को नहीं रोक सकेगा। इसके अलावा सभी निजी अस्पतालों में शवगृह की सुविधा और एंबुलेंस सेवा उपलब्ध करवाना भी अनिवार्य किया गया है।
उन्होंने बताया कि लावारिस अथवा आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्तियों के अंतिम संस्कार या दफन के लिए सहायता उपलब्ध करवाने के भी आदेश दिए गए हैं। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में शव सुरक्षित रखने के लिए मॉर्चरी बॉक्स उपलब्ध करवाने तथा सफाई कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण जैसे जूते, दस्ताने, सैनिटाइजर और बीमा सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
पद्मश्री शंटी ने कहा कि इतिहास में कई बड़े हादसों जैसे भोपाल गैस त्रासदी और 1984 के सिख नरसंहार के दौरान मानवाधिकार आयोग जैसी संस्थाओं की अनुपस्थिति के कारण पीड़ितों को समय पर न्याय नहीं मिल सका। उन्होंने कहा कि आज परिस्थितियां बदल चुकी हैं और आयोग यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि किसी भी पीड़ित को न्याय से वंचित न रहना पड़े।
उन्होंने बताया कि होशियारपुर उनका 20वां जिला है, जहां वे मानवाधिकार जागरूकता अभियान के तहत पहुंचे हैं। इससे पहले वे 19 जिलों में इसी प्रकार के कार्यक्रम आयोजित कर चुके हैं। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए कि आपदा प्रबंधन को लेकर हर तीन महीने में मॉक ड्रिल आयोजित की जाए, ताकि लोगों को आपात स्थिति से निपटने का प्रशिक्षण मिल सके।
इस अवसर पर अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (सामान्य) निधि कुमुद बंबाह, नगर निगम कमिश्नर ज्योति बाला मट्टू और एसपी नवनीत कौर ने आश्वासन दिया कि मानवाधिकार आयोग के सभी निर्देशों का पूर्ण रूप से पालन किया जाएगा। इस दौरान आयोग सदस्य के सचिव बलदेव सिंह सहित बड़ी संख्या में सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि, गांवों के सरपंच और नागरिक उपस्थित थे।












