Tuesday, September 22, 2026
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पंजाब सरकार की ‘नशों के विरुद्ध युद्ध’ मुहिम: पठानकोट के 1147 शिक्षकों को मिलेगा मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता प्रशिक्षण

होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। पंजाब सरकार ने राज्य में नशे की समस्या को रोकने और विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य में सुधार लाने के लिए अपनी ‘नशों के विरुद्ध युद्ध’ मुहिम को और तेज कर दिया है। इसी दिशा में, पंजाब के सरकारी हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों के शिक्षकों के लिए एक विशेष जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। अमृतसर, फाजिल्का, तरनतारन और गुरदासपुर जिलों में इस कार्यक्रम की सफलता के बाद, अब इसे पठानकोट जिले में आयोजित किया जा रहा है।

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राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (SCERT) पंजाब द्वारा जारी की गई रूपरेखा के अनुसार, पठानकोट में यह कार्यक्रम 21 सितंबर 2026 से 9 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। इस 15 दिनों तक चलने वाले विशेष प्रशिक्षण अभियान के दौरान जिले के लगभग 1147 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए 40-40 शिक्षकों के दो अलग-अलग समूह प्रतिदिन समानांतर रूप से चलाए जाएंगे ताकि व्यवस्था सुचारू रहे

इस प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य शिक्षकों को किशोरावस्था के दौरान होने वाले मानसिक बदलावों और नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना है। अक्सर बच्चे मानसिक तनाव या साथियों के दबाव के कारण नशे की ओर आकर्षित होते हैं। शिक्षकों को यह सिखाया जाएगा कि वे बच्चों के चिड़चिड़ेपन, उदासी या कक्षा में ध्यान न देने जैसी बातों को मात्र अनुशासन की कमी न मानें, बल्कि इसे एक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक समस्या के रूप में देखकर उनकी मदद करें। अमृतसर में हुए प्रारंभिक चरण के परिणाम बताते हैं कि इस प्रशिक्षण से शिक्षकों के दृष्टिकोण में भारी बदलाव आया है और वे बच्चों की समस्याओं को बेहतर ढंग से समझने लगे हैं

इस पूरी पहल का तकनीकी मार्गदर्शन मोहाली स्थित डॉ. बी.आर. अंबेडकर स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज द्वारा किया जा रहा है। पठानकोट के जिला शिक्षा अधिकारी इस संपूर्ण कार्यक्रम के प्रभारी होंगे। इसके अलावा, प्रत्येक स्कूल के मुखिया को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने विद्यालय से एक ‘नोडल शिक्षक’ नियुक्त करें, जो स्कूल स्तर पर इन सभी गतिविधियों की निरंतर निगरानी करेगा

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम पर लगभग 4 लाख 60 हजार रुपये का खर्च अनुमानित है, जिसे नशा मुक्त भारत अभियान के तहत उपलब्ध कोष से वहन किया जाएगा। यह पहल स्कूलों में एक सुरक्षित, समावेशी और मानसिक रूप से स्वस्थ वातावरण बनाने में काफी कारगर साबित होगी

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