
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट), होशियारपुर ने डाइट प्रिंसिपल धर्मेंद्र शर्मा के नेतृत्व में शिक्षकों के लिए ‘जीवन कौशल पाठ्यक्रम’ पर एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया। इस महत्वपूर्ण प्रशिक्षण का नेतृत्व डाइट संकाय की डॉ. रितु कुमरा ने किया, जो इस जीवन कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम की समन्वयक हैं।

डॉ. रितु कुमरा ने बताया कि पिछले शैक्षणिक सत्र में पंजाब के 15 जिलों में से प्रत्येक के दो स्कूलों में इस कार्यक्रम को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया था। उस प्रारंभिक चरण में होशियारपुर जिले से भी दो स्कूलों का चयन किया गया था। वर्तमान सत्र में, जिले के 40 स्कूलों में इस कार्यक्रम का विस्तार किया गया है, जिनमें 20 प्रायोगिक (experimental) और 20 नियंत्रण (control) स्कूल शामिल हैं। इस कार्यक्रम के दौरान उन स्कूलों के कुल 35 शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया, जहां यह पाठ्यक्रम सक्रिय रूप से लागू किया जाना है।
उन्होंने आगे जानकारी दी कि संबंधित 15 जिलों के समन्वयकों द्वारा शिक्षकों के मार्गदर्शन के लिए एक ‘एक्टिविटी मैनुअल‘ तैयार किया गया है। इसकी समीक्षा एससीईआरटी (SCERT) पंजाब के विशेषज्ञों द्वारा की गई है। स्कूलों में जीवन कौशल के प्रभावी कार्यान्वयन में सहायता के लिए यह मैनुअल शिक्षकों को प्रदान किया जाएगा। डब्ल्यूएचओ के जीवन कौशल ढांचे पर आधारित और एनईपी 2020 (NEP 2020) तथा एनसीएफ 2023 (NCF 2023) के अनुरूप तैयार किया गया यह पाठ्यक्रम गतिविधि-आधारित शिक्षा, कहानी सुनाने, कला-एकीकृत विधियों, संवाद और चिंतन का उपयोग करता है। यह छात्रों में आत्म-जागरूकता, भावनात्मक लचीलापन, संचार, सहानुभूति, आलोचनात्मक सोच और जिम्मेदार निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने में मदद करेगा।
इस पहल के महत्व पर जोर देते हुए डॉ. रितु कुमरा ने कहा कि जीवन कौशल आज के समय की सबसे बड़ी मांग है। इस तरह के कौशल छात्रों के बीच मानसिक दबाव और चिंता को कम करने, समाज में असामाजिक तत्वों से उन्हें सुरक्षित रखने और शिक्षार्थियों को 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार करने में मदद करते हैं। राज्य स्तर पर प्रशिक्षण सत्रों में भाग लेने वाले स.स.स.स हंदवाल के डॉ. हरदीप और डिगाना कलां की हेडमिस्ट्रेस हरप्रीत कौर ने भी प्रशिक्षण प्रदान करने में डॉ. रितु का सहयोग किया और प्रतिभागी शिक्षकों के साथ अपने जमीनी अनुभव सांझा किए। प्रशिक्षण के अंत में शिक्षकों ने अपनी कक्षाओं में इस पाठ्यक्रम को लागू करने और छात्रों के लिए एक सुरक्षित, सहायक और सकारात्मक सीखने का माहौल बनाने के प्रति अपना भारी उत्साह व्यक्त किया।












