
-डी.टी.ओ. ने कहा, बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर ही की गई कार्रवाई, परेशान करना नहीं था विभाग का मकसद -माउंट कार्मल स्कूल के प्रिंसिपल ने ट्रांसपोर्ट विभाग को सहयोग देने से किया मना: डी.टी.ओ- स्वास्थ्य विभाग की टीम भी थी साथ- टीम को स्कूल में आता देख कई ड्राइवर मौके से हुए फरार-भडक़े अभिभावकों ने बच्चों को बसों से उतारने पर जताया रोष-
होशियारपुर (द स्टैलर न्यूज़)। माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर सेफ स्कूल वाहन के तहत ट्रांसपोर्ट विभाग की तरफ से बच्चों की सुरक्षा को पुख्ता करने हेतु निरंतर चैकिंग की जा रही है। इस चैकिंग में जहां स्कूल बसों में जरुरी उपकरणों व कागजात की जांच की जा रही है वहीं ड्राइवर नशे में न हों, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा उनकी भी जांच की जाती है। परन्तु आज विभाग को हरियाना रोड स्थित माउंट कार्मल स्कूल में जहां स्कूल प्रबंधकों द्वारा सहयोग न दिए जाने के चलते परेशानी झेलनी पड़ी वहीं अभिभावकों के रोष का सामना उस समय करना पड़ा जब ट्रांसपोर्ट विभाग की टीम स्वास्थ्य विभाग की टीम को साथ लेकर डी.टी.ओ. जीवनजगजोत की अगुवाई में सकूल बसों का निरीक्षण करने तथा ड्राइवरों की जांच करने पहुंची। पता चला है कि इस दौरान स्कूल प्रिंसिपल ने विभाग की टीम को किसी भी तरह का सहयोग देने से इंकार करते हुए सारी जिम्मेदारी ट्रांसपोर्टर पर डाल दी। जबकि स्कूल की सारी जिम्मेदारी प्रिंसिपल की होती है।

डी.टी.ओ. ने जब बसों की चैकिंग शुरु की तो उस समय उसके साथ स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी साथ देखकर मौके से कई ड्राइवर वहां से खिस्क गए। जिसके चलते डी.टी.ओ. व स्वास्थ्य विभाग की टीम को शक हुआ और उन्होंने अपनी जांच और भी सख्ती के साथ शुरु की। परन्तु इसी बीच स्कूल में छुट्टी होने के चलते बच्चे बसों में बैठना शुरु हो गए। मगर विभाग द्वारा कार्रवाई के चलते बच्चों को बसों के भीतर गर्मी में बैठने को मजबूर होना पड़ा तथा उन्हें घर जाने में देरी भी होनी लगी। इसके चलते कुछ अभिभावक स्कूल पहुंच गए और उन्होंने विभाग की कार्रवाई के प्रति रोष व्यक्त किया। देखते ही देखते कई अभिभावक वहां

पहुंच गए और स्थिति तनावपूर्ण होने लगी। अभिभावकों का कहना था कि अगर विभाग को कार्रवाई करनी ही थी तो वे छुट्टी से पहले आकर कार्रवाई करते, छुट्टी के समय कार्रवाई किए जाने से बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ा है। इस दौरान उन्होंने जिलाधीश को इस संबंधी फोन पर सारी जानकारी दी।
इस संबंध में डी.टी.ओ. जीवनजगजोत ने बताया कि माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर स्कूल बसों की जांच की जा रही है तथा नियमों का पालन न करने वालों के चालन काटे जा रहे हैं तथा बसों को बॉंड भी किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि स्कूल प्रिंसिपल ने विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई में सहयोग से मना कर दिया था। उन्होंने बताया कि स्कूल में दिल्ली नंबर की एक बस खड़ी थी, जिसे हम परमिट जारी नहीं कर सकते। उन्होंने बताया कि नियमों की पालना न करने वाली 15 बसों के चालान किए गए हैं तथा 5 बसों को बॉंड किया गया है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि भविष्य में भी चैकिंग जारी रहेगी तथा बच्चों की सुरक्षा के साथ किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता।
दूसरी तरफ प्रिंसिपल थॉमस पहले तो मीडिया कर्मियों से दूर ही रहे तथा बात बिगड़ती देख जब उनसे बात की गई तो उन्होंने यह कहते हुए अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ दिया कि स्कूल की दो ही बसें हैं तथा उन पर जो कार्रवाई होगी वे उसके लिए जिम्मेदार हैं। बाकी की बसें अभिभावकों ने खुद लगवाई हैं उनकी बसों की जिम्मेदारी स्कूल नहीं लेगा।
इस दौरान बच्चों ने बताया कि चैकिंग के चलते उन्हें परेशानी जरुर हुई है, मगर हैरानी है कि अधिकतर बस वालों के पास कागजात ही पूरे नहीं थे। इसलिए ऐसे लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए। वैसे भी बसें बहुत ओवर क्राउडड होती हैं, ऊपर से नियमों की पालना न करना भी गलत है।












